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13 नबम्बर, 2019|11:23|IST

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घातक प्लास्टिक का सड़क निर्माण में होगा सदुपयोग

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रिसाइकलिंग करके पथ निर्माण को प्लास्टिक मुहैया कराएगी सरकार

पर्यावरण के लिए सबसे घातक प्लास्टिक से मजबूत बनेंगी सड़कें

भभुआ। कार्यालय संवाददाता

पर्यावरण के लिए सबसे घातक सिद्ध हो रहे अनुपयोगी प्लास्टिक के सदुपयोग का सबसे कारगर तरीका सड़क निर्माण माना जा रहा है। इसका प्रयोग पटना में तीन किमी. लंबी सड़क का निर्माण कराकर किया गया है। अगर यह प्रयोग सफल हुआ तो इसे कैमूर जिले में भी लागू किया जाएगा। कैमूर में सड़क निर्माण से जुड़े विभिन्न विभाग के कार्यपालक अभियंताओं का मानना है कि पथ निर्माण में प्लास्टिक के प्रयोग से न केवल सड़कें मजबूत होंगी, बल्कि वर्षा के पानी से खराब भी नहीं होगी। जमीन को बंजर बना रहे प्लास्टिक का सदुपयोग होने से पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।

पथ प्रमंडल भभुआ के कार्यपालक अभियंता बताते हैं कि तारकोल में आठ फीसदी तक प्लास्टिक मिलाकर सड़क निर्माण किया जा सकता है। महज एक कुंतल तारकोल में आठ किलोग्राम पॉलीथिन की खपत हो सकेगी। प्रति वर्ग मीटर खराब प्लास्टिक की खपत 116 ग्राम तक है। उन्होंने बताया कि सरकार प्लास्टिक को रिसाइकलिंग कराकर विभाग को उपलब्ध कराएगी। इसकी इकाई पटना में लगाई गई है। जिले के प्लास्टिक को इकट्ठा कर पटना भिजवाया जाएगा। मिट्टी की जगह प्लास्टिक का उपयोग किया जाएगा। प्लास्टिक पर रोलर चलाने के बाद उसके उपर अलकतरा डाला जाएगा।

जिले के स्कूलों को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाने का निर्देश डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने दिया है। बच्चे प्लास्टिक को इकट्ठा करेंगे। जो छात्र सबसे ज्यादा प्लास्टिक इकट्ठा करेंगे, उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। पिछले सप्ताह जिला प्रशासन व नगर परिषद की ओर से भी शहर में प्लास्टिक इकट्ठा करने का अभियान चलाया गया था। इस तरह का अभियान चलाकर जिले से प्लास्टिक इकट्ठा किया जा रहा है।

बोलते आंकड़े

01 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 116 ग्राम प्लास्टिक कचरे की खपत

08 किलो प्लास्टिक की खपत होगी एक कुंतल तारकोल में

10 साल तक सड़क मरम्मत कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी

ऐसे मिलाते हैं प्लास्टिक

पहले सड़क पर गिट्टी को 160 डिग्री सेल्सियस तक गरम करते हैं। महीन टुकड़ों में काटे गए प्लास्टिक बोतल, रैपर, प्लास्टिक बैग को इसमें मिला देते हैं, जो 30 सेकेंड में ही पत्थर से पूरी तरह मिल जाता है। इसके बाद इसमें तारकोल मिलाते हैं और सड़क पर बिछाया जाता है।

प्रति किमी. 800 किलो तारकोल की बचत

प्लास्टिक युक्त सड़क निर्माण से प्रति किमी एक लेन के निर्माण में 800 किलोग्राम तारकोल की बचत होगी। यानी 800 किलोग्राम प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाएगा। अमूमन एक लेन की एक किमी. सड़क निर्माण में 10 टन तारकोल का इस्तेमाल होता है।

तमिल विज्ञानी ने की थी इसकी शुरुआत

प्लास्टिक से सड़क निर्माण की तकनीक खोजने वाले विज्ञानी तमिलनाडु के राजगोपालन वासुदेवन प्लास्टिक मैन के नाम से प्रख्यात हैं। वर्ष 2001 में केमेस्ट्री लैब में उन्होंने प्रयोग कर यह तकनीक विकसित की। तारकोल और प्लास्टिक के बांड से सड़क की मजबूती जांची।

ये हैं फायदे

- सड़क ज्यादा वाहनों का दबाव झेल सकती है।

- जमीन तक पानी का रिसाव कम होता है।

- 10 साल तक मेंटेनेंस की जरूरत नहीं।

- प्लास्टिक डिस्पोज करने का सबसे उम्दा तरीका

- एक किमी सड़क निर्माण में आठ लाख पालीथिन बैग का इस्तेमाल संभव

कोट

सड़क निर्माण में प्लास्टिक के उपयोग पर राज्य सरकार विचार कर रही है। जल्द ही निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। इससे सड़क ज्यादा दिनों तक टिकाऊ और मजबूत होगी।

सुल्तान अहमद, ईई, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन

कोट

केंद्र सरकार ने सड़क निर्माण में प्लास्टिक का उपयोग करने का प्रस्ताव भेजा है। बिहार में इसके लागू होने की उम्मीद है। इससे प्रदूषण में कमी आएगी और सड़क मजबूत होगी।

राजकिशोर राजेश, ईई, पथ प्रमंडल भभुआ

फोटो- 11 अक्टूबर भभुआ- 6

कैप्शन- शहर के कैमूर स्तंभ से पूरब बस पड़ाव जानेवाली सड़क।

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