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10 दिसंबर, 2019|10:45|IST

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मासूम को बाइक से पांच सौ गज तक घसीटते रहा

खून से लथपथ सरैयां गांव के बच्चे को गंभीर हालत में सदर अस्पताल के डाक्टरों ने किया रेफर

बेहतर इलाज के लिए एम्बुलेंस से ट्रामा सेंटर ले गए परिजन

बाइक से धक्का लगने के बाद बच्चे का फंस गयी थी कमीज

06 बजे सुबह में हुई दुर्घटना

08 बजे के बाद किया गया रेफर

भभुआ। हिन्दुस्तान टीम

जिले के भगवानपुर-मुंडेश्वरी पथ में मंगलवार की सुबह अजीब दृश्य दिखा। तीन वर्षीय एक बच्चे का शर्ट बाइक में फंसा था और उसका चालक उसे घसीटते हुए तेजी से आगे की ओर बढ़ रहा था। राहगीर शोर मचा रहे थे। लेकिन, वह डर से बाइक रोक नहीं पा रहा था। उसे भीड़ द्वारा खुद को पीटे जाने की चिंता सता रही थी, लेकिन बाइक में फंसकर घसीटा रहे बच्चे की जिंदगी का उसे तनिक भी ख्याल नहीं रहा। ऐसा लगा मानों उसके अंदर मानवता नाम की कोई चीज नहीं है। जब उसने पथ में सन्नाटा पाया तो बाइक रोककर बच्चे को उससे अलग किया और फिर बाइक लेकर तेजी से भाग निकला।

ग्रामीण जब बच्चे के पास पहुंचे तो वह खून से लथपथ दर्द से कराह रहा था। पीड़ित अंकुश भगवानपुर थाना क्षेत्र के सरैयां निवासी महेन्द्र साह का पुत्र है। ग्रामीण व परिजन उसे लेकर सदर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में डॉ. जीतेंद्र नाथ सिंह ने उसका प्राथमिक उपचार किया और बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया। परिजन एम्बुलेंस से लेकर उसे वाराणसी के ट्रामा सेन्टर के लिए निकल गए। चिकित्सक ने बताया कि अंकुश की हालत गंभीर है।

सदर अस्पताल में मिले पीड़ित के पिता महेन्द्र साह ने बताया कि मंगलवार की सुबह उनका बेटा शौच करने के लिए मुख्य सड़क से जा रहा था। इसी दौरान मुंडेश्वरी की ओर से रोहित कुमार नामक युवक तेज गति से बाइक लेकर आ रहा था। उसने बाइक से अंकुश को जोरदार धक्का मारा। बच्चे की कमीज बाइक में फंस गई। राहगीरों ने शोर मचाया, लेकिन वह बाइक रोका नहीं और बच्चे को घसीटते हुए सरैयां गेट से मसही पुल तक 500 गज लेते गया, जिससे वह लहूलुहान हो गया।

अस्पताल पहुंचाने के बजाय छोड़कर भागा

अस्पताल में मिले ग्रामीणों रोहन कुमार, अखिलेश कुमार ने बताया कि रोहित ने गलती की है। एक तो उसने बाइक से बच्चे को धक्का मारा। जब उसका शर्ट उसके बाइक में फंस गया तो उसे मोटरसाइकिल रोककर बच्चे को उससे अलग कर देना चाहिए था। ऐसा थोड़े था कि भीड़ उसकी पिटाई करती। लेकिन, अब तो उसने बच्चे की जिंदगी खतरे में डाल दी है। अब क्या होगा? उसे चाहिए था कि बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने में मदद करें। लेकिन, उसने ऐसा नहीं किया। खुद पिटाई के डर से बच्चे की जिंदगी को आफत में डाल दिया।

बाइक चालक के पिता पहुंचे इलाज कराने

दुर्घटना की सूचना जैसे ही बाइक चालक रोहित के पिता दवा व्यवसायी समहुता निवासी मुन्ना कुमार को मिली वह भागे-भागे सदर अस्पताल पहुंचे और घायल अंकुश का इलाज कराने में जुट गए। उन्होंने पीड़ित परिजनों से कहा कि बच्चे का इलाज अच्छे से कराएंगे और इलाज में जितना भी खर्च आएगा वह वहन करेंगे। दवा पर आनेवाले खर्च का वह भुगतान भी करते दिखे। हालांकि मुन्ना कुमार द्वारा मदद किए जाने से पीड़ित परिजनों की थोड़ी नाराजगी कम दिखी।

फोटो- 28 मई भभुआ- 1

कैप्शन- बाइक के धक्के से मंगलवार को जख्मी होने के बाद सदर अस्पताल में भर्ती सरैयां का घायल बच्चा।

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