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नेतन के मुंह से गोली-बंदूक क बात शोभा नाही देत ह

डड़वा गांव के वृद्धजनों ने हिन्दुस्तान के समक्ष रखी अपने मन की बातें

कहा, पूरे जीवन में लोकतंत्र की सुरक्षा ऐसे करने की बात नहीं सुनी

भभुआ। कार्यालय संवाददाता

का कहीं बचवा, नेतन लोगन के मुंह से गोली आ बंदूक क बात सुन के बहुत अजीब लागत बा। ई सब बात शोभा नइखे देत। कहत हउवन कि हम बंदूक क बल पर लोकतंत्र के सुरक्षा करम। कइसे करिहें। का केहू क हत्या करिहें? एके से रक्षा होई। यह बातें 75 से 91 वर्ष उम्र के वृद्धजनों ने आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान से बातचीत में कही। ईवीएम को लेकर तीन दिनों से चल रहे सियासी घमासान के दौरान रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा द्वारा खून खराबा होने व बक्सर के निर्दल प्रत्याशी भभुआ के पूर्व विधायक रामचंद्र पासवान द्वारा हथियार की बदौलत लोकतंत्र की सुरक्षा करने की कही गई बात के बाद उक्त लोग अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।

मतगणना केंद्र के सामने स्थित डड़वा गांव के 91 वर्षीय रघुनाथ बिंद ने कहा कि नेताओं की जुबान से उन्होंने ऐसी भाषा कभी नहीं सुनी। लेकिन, टीवी पर यह सब देखने व सुनने को मिल रहा है। गांव के 83 वर्षीय हरिद्वार बिंद कहते हैं कि लोकतंत्र की सुरक्षा बंदूक के बल पर कभी नहीं की जा सकती। महात्मा गांधी अहिंसा के पुजारी थे। उन्होंने देश को आजाद कराया। लेकिन, कभी बंदूक की बात नहीं की। देश के नौजवान शहीद हो गए। 75 वर्षीय दु:खी बिंद ने कहा कि देश संविधान से चलता है। अगर देश की सुरक्षा की इन्हें इतनी ही फिक्र है तो सीमा पर दुश्मनों की सामना करके दिखाएं, पता चल जाएगा।

इसी गांव के 82 वर्षीय मुखलाल बिंद कहते हैं कि उनके गांव के बूथ पर कभी किसी से विवाद नहीं हुआ। कौन किसे वोट दे रहा है इससे भी कोई मतलब नहीं रखता। फिर भी बूथ को संवेदनशील की श्रेणी में डाल दिया गया। अगर नेता न्याय की बात करते हैं तो शांत बूथ को संवदेनशील घोषित करते वक्त वह कहां थे। पहले की सरकार में साड़ी, धोती, चीनी, किरासन, कॉपी, पेंशन सब कुछ समय पर मिलता था। लेकिन, आज पेंशन भी समय से नहीं मिल रही है। नेताओं को इसके लिए काम करना चाहिए। ग्रामीण 75 वर्षीय कन्हैया शर्मा का कहना था कि नेताओं को शस्त्र के बल पर लोकतंत्र की सुरक्षा करने और इवीएम व मत को लेकर खून-खराबा होने की बात करना देशहित में नहीं हो सकता।

फोटो- 23 मई भभुआ-

कैप्शन- ईवीएम को लेकर चल रहे सियासी घमासान पर मोहनियां के डड़वा गांव में गुरुवार को अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते वृद्धजन।

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