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9 दिसंबर, 2019|2:47|IST

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पूर्व विधायक की शव यात्रा में भाए लिए हजारों लोग

अश्रुपूर्ण आंखों से दी विजय शंकर दुबे को अंतिम विदाई

ग्रामीणों द्वारा उनके शव पर जगह-जगह किया गया माल्यार्पण

1990 में पहली बार भभुआ से चुने गए थे विधायक

1966 में बीएचयू छात्र परिषद के चुने गए थे सदस्य

रामपुर। एक संवाददाता

कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे पूर्व विधायक विजय शंकर पांडेय की शव यात्रा में शुक्रवार को हुजूम उमड़ पड़ा। उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की कतार लगी थी। किसी ने पुष्पांजलि अर्पित की तो किसी ने माल्यार्पण किया। अश्रुपूर्ण आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनकी शव यात्रा में विभिन्न दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता व ग्रामीण शामिल हुए।

उनके पार्थिव शरीर पर पूर्व विधायक प्रमोद सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र पाल, मुखिया किरण देवी, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राधेश्याम कुशवाहा, डॉ. राजकुमार पांडेय, नंदबिहारी सिंह, गणेश दत्त पांडेय, अफसार खां, दिनेश शुक्ला, करुणापति तिवारी, तारकेश्वर पांडेय, विनय शंकर पांडेय, धर्मपाल सिंह, विजय बहादुर राम, कन्हैया उपाध्याय, बीडीओ अरविंद कुमार सिंह सहीत सैकडो लोगों ने पुष्प अर्पित कर हजारों लोगों ने शव यात्रा में भी भाग लिया।

जब उनकी शव यात्रा निकली तो फूलों की बरसात होने लगी। लोग विजय शंकर बाबू अमर रहे के नारे लगाने लगे। उनका अंतिम दर्शन करने के लिए लोग छत के छज्जे, गलियों व दरवाजों पर कतार लगाए खड़े दिखे। महिलाएं भी घर की खिड़कियों व छत की रेलिंग से उनका दर्शन कर रही थीं। वह अपने दरवाजे पर लोटा से पानी भी ढलका रही थीं। शव यात्रा के पीछे वाहनों का लंबा काफिला था। लोग जगह-जगह उनके शव पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर रहे थे। बेलांव में भीड़ इतनी जुटी कि रोड जाम हो गया।

पांच साल तक किया था प्रतिनिधित्व

विजय शंकर पांडेय वर्ष 1990 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे थे। उन्होंने पांच साल के अपने कार्यकाल में क्षेत्र की कई समस्याओं का समाधान कराया था। यही कारण था कि उनके निधन की खबर सुनकर आमजन भी उनके पैतृक गांव खरेंदा में पहुंचे थे।

बनारस से भोर में पहुंचा शव

जब बीएचयू से उनके पार्थिव शरीर को शुक्रवार की भोर चार बजे उनके पैतृक गांव खरेंदा लाया गया। परिजन व रिश्तेदार उनके शव आने का इंतजार कर रहे थे। दाह संस्कार करने के लिए उनके शव को वाराणसी के मणीकर्णिका घाट ले जाया गया। इसके पहले उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए कांग्रेस के जिला कार्यालय शहीद भवन में रखा गया।

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