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रोहिणी में बराज से भी पानी मिलने में है संशय

आठ जून को उतर जाएगा रोहिणी नक्षत्र, किसान डीजल पंप चलाकर डाल रहे हैं बिचड़ा

एक लाख 10 हजार हेक्टेयर में रोपनी एवं 5500 में बिचड़ा डालने की है कैमूर में तैयारी

25 मई को ही पानी छोड़ने की थी घोषणा

भभुआ। हिन्दुस्तान संवाददाता

खरीफ की खेती में जुटे कैमूर के किसानों की परेशानी कम नहीं हो रही है। दुर्गावती जलाशय के अफसरों ने धान का बिचड़ा डालने के लिए परियोजना से पानी छोड़ने के मामले में पहले ही हाथ खड़ा कर दिया है। अब इंद्रपुरी बाराज से भी बिचड़ा डालने के लिए पानी मिलने में संशय दिख रहा है। सिंचाई विभाग ने 25 मई से धान का बिचड़ा डालने के लिए नहरों में पानी छोड़ने की घोषणा की थी। लेकिन, नहरों में अब तक पानी नहीं पहुंचा है।

सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता भूपेश प्रसाद सिंह का कहना है कि आरा कैनाल में मिट्टी की जांच के लिए 28 मई को पटना से इंजीनियरों की टीम आने वाली थी। इस कारण 25 मई को बराज से पानी नहीं छोड़ा जा सका। बुधवार को पानी छोडे़ जाने की उम्मीद है। इधर रोहिणी नक्षत्र संपन्न होने में अब मात्र एक सप्ताह का समय शेष रह गया है। ऐसी स्थिति में सिंचाई संकट को लेकर किसानों का माथा ठनक रहा है। क्योंकि धान का बिचड़ा डालने के लिए रोहिणी नक्षत्र शुभ माना गया है। किसानों का मानना है कि रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा डालने पर अगर समय से बारिश हुई तो उपज अच्छी होती है।

डीएम ने भी दिया है निर्देश

कृषि विभाग ने इस साल एक लाख दस हजार हेक्टेयर में धान की रोपनी के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए 5500 हेक्टेयर में धान का बिचड़ा डाला जाना है। जिला कृषि पदाधिकारी भरत सिंह ने बताया कि धान का बिचड़ा डालने के लिए रोहिणी नक्षत्र शुभ माना गया है। इस नक्षत्र में बिचड़ा डालने पर खरीफ की खेती अग्रतर होती है। डीएओ ने बताया कि डीएम द्वारा जारी निर्देश के आलोक में सिंचाई विभाग को धान का बिचड़ा डालने के लिए नहर में पानी छोड़ने को कहा गया है।

डीजल पंप से भी नहीं मिल रहा पानी

भीषण गर्मी के बीच जलस्तर काफी नीचे खिसक गया है। इससे पेयजल के साथ-साथ सिंचाई की समस्या भी उत्पन हो गई है। असरवलिया के किसान जगदम्बा चौबे, निमी गांव के किसान रामानंद सिंह एवं खजुरा के अमर सिंह ने बताया कि धान का बिचड़ा डालने के लिए दो दिनों से डीजल पंप चला रहे हैं। जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि पंप नहीं के बराबर पानी दे रहा है। किसानों ने यह भी बताया कि खेत में दरारें उभरने लगी हैं। पर्याप्त पानी नहीं निकलने से पैसा व समय दोनों की बर्बादी हो रही है।

कोट

25 मई को बराज से सोन उच्चस्तरीय नहर में पानी खोलने की सूचना विभाग से मिली थी। 28 मई को आरा कैनाल में पटना के इंजीनियरों की टीम मिट्टी की जांच करने वाली थी। इस कारण 25 को पानी नहीं छोड़ा जा सका। बुधवार की शाम तक नहर में पानी छोड़े जाने की उम्मीद है।

भूपेश प्रसाद सिंह, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग

फोटो-30 मई भभुआ- 6

कैप्शन- रामपुर प्रखंड के अकोढ़ी गांव के पास सूखी पड़ी सोन उच्चस्तरीय नहर।

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