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दो सौ साल में भगवानपुर में किसी की नहीं हुई थी हत्या

पहली बार दो लोगों को धारदार हथियार से उतार दिया मौत के घाट

बोले ग्रामीण, पंडा के कारण थाने की पंजी में दर्ज होगी पहली घटना

भगवानपुर। एक संवाददाता

प्रखंड मुख्यालय का भगवानपुर गांव शुरू से शांत रहा है। छोटी वारदात को नजरअंदाज करें, तो दो सौ सालों में यहां कभी किसी की हत्या नहीं हुई। भगवानपुर प्रखंड नक्सल प्रभावित है। फिर भी ग्रामीणों की आपसी एकता ने प्रखंड मुख्यालय में नक्सलियों को कभी पांव पसारने का मौका नहीं दिया। दस्यु सरगना के समय भी डकैतों को कभी पनाह नहीं मिला है। थाने की पंजी में भगवानपुर में किसी की हत्या का मामला दर्ज नहीं है। लेकिन, महाब्राह्मण टोली के छोटकन पांडेय उर्फ पंडा के कारण पहली बार हत्या का मामला दर्ज होगा।

इस घटना से ग्रामीणों में नाराजगी व आश्चर्य दोनों देखा जा रहा है। नाराजगी इस बात को लेकर कि छोटे विवाद में अपने खून की हत्या करना और आश्चर्य इस बात का है कि रोजी-रोटी की जुगाड़ में बाहर रहनेवाला पंडा इस तरह की घटना को कैसे अंजाम दे दिया? समाजसेवी व स्थानीय निवासी आलोक सिंह कहते हैं कि दस्यु सरगना के चाहे मोहन बिंद, रामअशीष बिंद रहे हों या फिर रामअशीष कोइरी उर्फ दादा या फिर नक्सलियों के बड़े खलीफा रहे हो किसी ने भगवानपुर की ओर देखने की हिम्मत नहीं जुटाई। लेकिन, गांव में हुई दो लोगों की हत्या ने ग्रामीणों को काफी दु:ख पहुंचाया है।

भगवानपुर के 95 वर्षीय केदार पांडेय व 90 वर्षीय सुराती कंुअर बताती हैं कि ‘बचवा हमनी के गांव में आपस में केतनों विवाद हो जात रहल, कबो कोई के जान के दुश्मन नाहीं बनलन। लेकिन, दोई लोगन के मार के पंडा गांव के प्रतिष्ठा के हनन कर देहलन।

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