
अखलासपुर बस स्टैंड में नहीं है रेन बसेरा,जर्जर विश्रामालय बने मुसाफि़रों की मजबूरी
पेज चार की फ्लायर खबरपेज चार की फ्लायर खबर अखलासपुर बस स्टैंड में नहीं है रेन बसेरा,जर्जर विश्रामालय बने मुसाफि़रों की मजबूरी दो-दो
पेज चार की फ्लायर खबर अखलासपुर बस स्टैंड में नहीं है रेन बसेरा,जर्जर विश्रामालय बने मुसाफि़रों की मजबूरी दो-दो विश्रामालय होते हुए भी यात्रियों के लिए नहीं है बैठने-रुकने की कोई व्यवस्था लंबे समय से उपेक्षा के कारण छज्जे का गिरना, दुकानदारी और अव्यवस्था बनी आम जिला व नगर प्रशासन ध्यान दे तो बस स्टैंड विश्रामालय बन सकता है उत्तम मॉडल टिकट घर, साफ-सफाई व मरम्मत से यात्रियों को मिल सकती है बड़ी राहत भभुआ, नगर संवाददाता। शहर के अखलासपुर बस स्टैंड की स्थिति इन दिनों बेहद चिंताजनक बनी हुई है। यहां यात्रियों के लिए न तो रेन बसेरा की कोई व्यवस्था है और न ही सुरक्षित तरीके से बैठने-रुकने के लिए जगह।

शहर का यह प्रमुख बस स्टैंड रोज़ाना हजारों यात्रियों की आवाजाही का केंद्र है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। बस स्टैंड परिसर में एक यात्री विश्रामालय जरूर बना हुआ है, लेकिन उसकी हालत बेहद खराब है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ समय पहले तक इस जर्जर भवन में एक टायर दुकान चलती थी। दुकान संचालक द्वारा सामान हटाए जाने के बाद भी भवन की मरम्मत या सफाई की कोई व्यवस्था नहीं हुई। विश्रामालय की दीवारें उखड़ रही। दरवाज़े तो नहीं हैं, खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं और किसी भी यात्री के रुकने योग्य वातावरण नहीं बचा है। इसी के बगल में एक और विश्रामालय बना है, जिसकी स्थिति तो और भी खराब बताई जा रही है। यात्रियों के अनुसार इस भवन का पश्चिमी छज्जा टूटकर नीचे गिर चुका है। यह स्थिति न सिर्फ अव्यवस्था को दर्शाती है, बल्कि संभावित हादसे का भी कारण बन सकती है। भवन के अंदर गैरेज वालों ने अपने मोबिल के ड्रम रख दिए हैं और उसे दुकान के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सरकारी संपत्ति का गलत उपयोग होने के साथ-साथ यात्रियों की सुविधाओं पर सीधा प्रहार है। जाड़े में ठंड व गर्मी में धूप से बचने का नहीं है कोई साधन ठंड के मौसम में राहगीरों और यात्रियों को रात बिताने या कुछ समय ठहरने के लिए रेन बसेरा की बेहद जरूरत होती है। वर्तमान परिस्थिति में बस स्टैंड में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं होने से लोग खुले में ठिठुरने को मजबूर हैं। बारिश, ठंड या धूप के समय प्रतीक्षारत यात्रियों के लिए कोई सुरक्षित आश्रय न होना गंभीर समस्या है। जय नारायण कुशवाहा, विनोद सिंह, प्रभावती देवी, रामराज बिन्द, बंशीधर मल्लाह आदि यात्रियों का कहना है कि बस स्टैंड का कोई मां-बाप अर्थात देखरेख करने वाला जिम्मेदार विभाग या अधिकारी नज़र नहीं आता। रख-रखाव, सफाई, मरम्मत और अवैध उपयोग पर नियंत्रण की कोई पहल अभी तक नहीं हुई है। प्रशासन चाहे तो बन सकता है मॉडल बस स्टैंड यदि जिला प्रशासन और नगर परिषद इस मुद्दे पर संज्ञान लें तो अखलासपुर बस स्टैंड को एक मॉडल बस स्टैंड के रूप में विकसित किया जा सकता है। यात्री विश्रामालय की मरम्मत, रेन बसेरा निर्माण, टिकट घर की स्थापना और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था हो जाए तो यह क्षेत्र यात्रियों के लिए राहत का केंद्र बन सकता है। वर्तमान में टिकट घर भी नहीं होने के कारण यात्रियों को टिकट लेने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है, जिससे अनावश्यक समय और परेशानी बढ़ती है। शहर के लिए यह बस स्टैंड न केवल यातायात का महत्वपूर्ण बिंदु है, बल्कि स्थानीय व्यवसाय और आम जनजीवन का भी हिस्सा है। प्रशासन यदि समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए, तो यह बस स्टैंड बेहतर व्यवस्था, सुरक्षा और सुविधा का उत्कृष्ट उदाहरण बन सकता है। फोटो- 11 दिसंबर भभुआ-06 कैप्शन- अखलासपुर बस स्टैंड में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ा यात्री विश्रामालय

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