पराली जलाने से होनेवाले नुकसान की जानकारी दी
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को पराली जलाने के खिलाफ जागरूक करने के लिए बाइक जुलूस निकाला। इसमें शामिल कर्मियों ने स्लोगन के साथ किसान क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट होते हैं और यह गंभीर वायु प्रदूषण का कारण बनता है।

कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मियों ने किसानों को किया जागरूक पढ़ौती, टोड़ी, कसेर, जैतपुर, मोकरम, भगवानपुर, पहड़िया में जुलूस निकाला (पेज चार) भगवानपुर, एक संवाददाता। कृषि विभाग के कर्मियों द्वारा बुधवार को किसानों को खेतों में पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करने को ले बाइक जुलूस निकाला। कृषि विभाग के कर्मी स्लोग्न लिखी तख्ती हाथों में लिये थे, जिसपर पराली नहीं जलाना है-जैविक खाद बनाना है, धरती माता करे पुकार-मत जलाओ पराली पुआल आदि स्लोगन लिखे हुए थे। भगवानपुर कृषि कार्यालय से निकाले गए जुलूस में शामिल शामिल कर्मी पढ़ौती, टोड़ी, कसेर, जैतपुर, मोकरम, भगवानपुर, पहड़िया आदि गांव में भ्रमण कर किसानों को जागरूक किए।
रैली में प्रखंड कृषि पदाधिकारी अशोक पासवान, कृषि समन्वयक शशि भूषण तिवारी, रामेश्वर तिवारी, कृषि किसान सलाहकार संपूर्णानंद, जगदीश प्रसाद, रवि शंकर सिंह, अजीत कुमार, अरुण कुमार, रंजीत कुमार आदि शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि खेत में पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम नष्ट हो जाते हैं, जिससे उपज की क्षमता घटती है। यह गंभीर वायु प्रदूषण फैलाता है। इससे निकलनेवाली गैस सांस की बीमारियों, कैंसर और आंखों में जलन का कारण बनती हैं। साथ ही, यह मिट्टी के मित्र कीटों को मारकर जमीन को बंजर बना देता है और खड़ी फसलों में आग लगने का खतरा पैदा करता है। (भगवानपुर से अमरनाथ पांडेय)
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