Waalidan s maiden is not complacent - वालिदैन के नाफरमान की मगफेरत नहीं होती DA Image

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वालिदैन के नाफरमान की मगफेरत नहीं होती

रमज़ानुलमुबारक के पाक माह में भी तीन प्रकार के लोगों को माफी नहीं मिलती। इसमें पहला वह जिसने रमज़ानुलमुबारक का बाबरकत महीना को पाया लेकिन उसकी कद्र नहीं की। दूसरा वह जिसके सामने हुजूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जिक्र हो और वह दरूद न पढ़े और तीसरा शख्स वह जिसके वालिदैन बूढ़े हों और वह उनकी फरमाबरदारी न करे। ये बातें जामा मस्जिद नुरूल्लाहपुर के इमाम मौलाना मोहम्मद मोइनुद्दीन साहब ने 19वें रमज़ानुलमुबारक के मौके पर शनिवार को अपनी नूरानी तकरीर के दौरान कहीं।

उन्होंने हदीस शरीफ के हवाले से बताया कि एक बार हुजूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मस्जिद के पहले मेम्बर पर कदम रखे तो फरमाया आमीन। इसी तरह दूसरे व तीसरे मेम्बर पर कदम रखे तो भी फरमाया आमीन। जब आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुत्बे से फारिग होकर मेम्बर से नीचे उतरे तो सहाबाकराम रज़ियल्लाहू अन्ह ने पूछा कि आज मेम्बर की सीढ़ी चढ़ते वक्त आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जो आमीन कहा, हम लोगों ने पहले कभी नहीं सुना। इस सवाल पर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि जब मैं मेम्बर की सीढ़ी चढ़ रहा था, उस वक्त हजरत जिब्रील अलैहिस्सलाम सामने आए थे। जब मैंने पहले मेम्बर पर कदम रखा तो उन्होंने कहा कि हलाक हो जाए वह शख्स जिसने रमज़ानुलमुबारक का बाबरकत महीना पाया फिर भी उसकी मगफेरत न हुई, तो मैंने कहा आमीन। इसी तरह दूसरे व तीसरे मेम्बर पर कदम रखते वक्त जिब्रील अलैहिस्सलाम ने फरमाया हलाक हो जाए वह शख्स जिसके सामने आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जिक्र हो और वह दरूद न पढ़े और तीसरा शख्स वह जिसके वालिदैन बूढ़े हों और वह उनकी फरमाबरदारी न करे। इस हदीस शरीफ से स्पष्ट है कि हजरत जिब्रील अलैहिस्सलाम की तीन बद्दुआ पर हुजूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आमीन कहे। इसलिए हमें चाहिए कि रमज़ानुलमुबारक के मौके पर अपनी इबादत से मगफेरत करवाते हुए वालिदैन की खिदमत करने के साथ खुदा की रजा पाने की कोशिश करते हुए इन तीन बद्दुआ से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

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  • Web Title:Waalidan s maiden is not complacent