
आयुर्वेद की बेहतरी के लिए आयुष मंत्रालय का गठन हो: गिरिराज
राजकीय अयोध्या शिवकुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय में चिकित्सकों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरूविद्यालय परिसर में शनिवार को चिकित्सकों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में पहुंचे चिकित्सक व अन्य। ...
बेगूसराय, निज प्रतिनिधि। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि आयुर्वेद हमारी विरासत है।. शल्य चिकत्सा का जन्मदाता आयुर्वेद है। उसके बाद यह लगातार पिछड़ रहा है। आज पैकेजिंग व ब्रांडिंग का जमाना है। आयुर्वेद लोकप्रिय होगा तो मानव की जीवनशैली बदल जाएगी। आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने के लिए बिहार में अलग से आयुष मंत्रालय बनाने की जरुरत है। यह बात सांसद-सह- केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहीं। वे शनिवार को राजकीय अयोध्या शिवकुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय में आयुर्वेद के प्रचार प्रसार एवं उसके वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक पशुओं पर केंद्रित आयुरकॉन 2026 नेशनल कांफ्रेंस ऑफ आयुर्वेद के चिकित्सकों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय स्त्री एवं प्रसूति रोग, शल्य चिकित्सा एवं औषधि जैसे विशिष्ट विषय पर आयुर्वेद की वर्तमान महत्ता को बताने के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के चिकित्सक अपने अनुभव को साझा करते हुए तकनीक जानकारी अन्य चिकित्सकों को देंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद से पूरे विश्व में आयुर्वेद की पहचान बढ़ गई है। आज देशभर में साढ़े सात लाख पंजीकृत शिक्षक हैं। 30 देशों में आयुर्वेद को मान्यता मिली है। बिहार में 300 वेलनेस सेंटर हैं। विश्व के विभिन्न देशों से आयुर्वेद के विशेषज्ञों की मांग बढ़ गई है। उन्होंने कहा आयुर्वेद ही नहीं वरुण योग ने भी पूरे भारत में अपनी पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने आयुर्वेद को आगे बढ़ने का ठाना है। हम पूरे देश में इसके केंद्र स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने आयुष मंत्रालय के लिए एक अलग विभाग गठित किया है जिससे आयुर्वेद का प्रचार प्रसार हो सके। आयुर्वेद मानव जीवन शैली का विज्ञान है बिहार सरकार के गन्ना मंत्री संजय कुमार ने कहा कि आयुर्वेद हमारे जीवन शैली और जन-जन का विज्ञान है। बिहार सरकार ने हाल के दिनों में बड़ी संख्या में आयुष चिकित्सकों की बहाली की है। उन्होंने कहा कि मैं खुद आयुर्वेद की चिकित्सा का कायल हूं । इसके पूर्व आयुर्वेद महाविद्यालय पहुंचने पर दोनों मंत्रियों ने भगवान धनवंतरि की प्रतिमा एवं संस्थापक दानवीर अयोध्या बाबू की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। प्राचार्य डॉक्टर श्रीनिवास त्रिपाठी ने आगत आतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आयुर्वेद महाविद्यालय ने आम जनता के बीच अपनी पहचान स्थापित की है। राज्य आयुष समिति के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ धनंजय शर्मा ,आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ लाल कौशल कुमार, सचिव डॉक्टर दिलीप कुमार वर्मा, कोषाध्यक्ष डॉक्टर रामसागर दास आदि ने अगाथा अतिथियों का स्वागत किया। मंच का संचालन डॉक्टर मुन्ना कुमार ने किया। उद्घाटन समारोह के बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय की डॉ. अनुराधा राय एवं डॉ बीके द्विवेदी ने वैज्ञानिक सत्र को संबोधित किये। इस अवसर पर नौ चिकित्सकों को लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड एवं सट्टा चिकित्सकों को आयुर्वेद गौरव सम्मान से विभूषित किया गया। आयुर्वेद के प्रचार प्रसार के लिए कॉलेज परिसर में सात कॉउंटर बनाये गये थे। इसमें 100 से अधिक चिकित्सक पहुंचे।कॉलेज परिवार की ओर से अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

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