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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं को दिया गया प्रशिक्षण

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं को दिया गया प्रशिक्षण

संक्षेप:

नावकोठी में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत आंगनबाड़ी सेविकाओं और आशा कर्मियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सीडीपीओ ने बताया कि बाल विवाह एक कानूनी अपराध है, जो बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को प्रभावित करता है। जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

Jan 09, 2026 07:47 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बेगुसराय
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नावकोठी, निज संवाददाता। प्रखंड के ई किसान भवन में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत गुरुवार को आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं आशा कर्मियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया ।अध्यक्षता सीडीपीओ ने की। उन्होंने कहा कि बाल विवाह कानूनन अपराध है।बाल विवाह का मतलब है किसी बच्चे (लड़की या लड़के) की शादी जब वह कानूनी रूप से विवाह के लिए निर्धारित उम्र (लड़की के लिए 18 और लड़के के लिए 21 साल) से कम हो, यह एक सामाजिक बुराई और कानूनी अपराध है, जो बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को बुरी तरह प्रभावित करता है और भारत मे बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत दंडनीय है।

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पैनल अधिवक्ता शारदा कुमारी ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए निरंतर निगरानी और व्यापक जन जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए अपने अपने क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया। आंगनबाड़ी सेविका एवं आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे अहम है,क्योंकि वे सीधे परिवारों और बच्चों से जुड़ी होती हैं।उन्होंने कहा कि भारत में, 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र के लड़के का विवाह बाल विवाह कहलाता है, भले ही यह औपचारिक हो या अनौपचारिक रिश्ता हो। यह बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत एक कानूनी अपराध है। इससे शिक्षा रुक जाती है और भविष्य के अवसर कम हो जाते हैं।गर्भावस्था और प्रसव के कारण स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता है, जिससे शिशु मृत्यु दर भी बढ़ सकती है।मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, घरेलू हिंसा और शोषण का खतरा होता है। गरीबी, लैंगिक असमानता और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के कारण यह प्रथा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में ज़्यादा प्रचलित है। यूनिसेफ के अनुसार, दुनिया भर में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के बीच कोई भी विवाह बाल विवाह कहलाता है, और इसे खत्म करने के लिए वैश्विक प्रयास जारी है। न्यायमित्र राजदीपक गुप्ता,महिला पर्यवेक्षिका कुमारी कृष्णा,शालिनी कुमारी,हेमलता कुमारी,संजीत कुमार सहित सेविका मीना कुमारी, रोजी खातून, शकीला बेगम,कमरून निशा बेग, मधुरानी, राजकुमारी, ममता कुमारी,रंजू कुमारी, निर्मला कुमारी सहित अन्य मौजूद थे।