जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में थैलेसीमिया की जांच हो अनिवार्य: गिरिराज
बिगुशराई जिले में थैलेसीमिया की जांच अनिवार्य करने की बात की गई। सांसद गिरिराज सिंह ने कहा कि इससे रोगियों की पहचान संभव होगी। 84 सरकारी और 20 निजी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की जानकारी दी गई। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

जिले के सभी सरकारी अस्पताल खासकर उप स्वास्थ्य केंद्र पर अन्य जांच के साथ थैलेसीमिया की जांच अनिवार्य हो। इससे प्रारंभिक स्तर में ही थैलेसीमिया मरीजों की पहचान हो सकेगी। पहचान के बाद उसका इलाज संभव हो पाएगा। इससे बेगूसराय जिला थैलेसीमिया रोग मुक्त बनेगा। यह तभी संभव है जब आमलोग जागरूक होंगे व जांच में सहयोग देंगे। यह बात स्थानीय सांसद-सह- केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहीं। वे शुक्रवाार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से सदर प्रखंड के कंकौल प्रेक्षा गृह में आयोजित विश्व थैलेसीमिया दिवस पर बोल रहे थे।
थैलेसीमिया रोगियों की पहचान
उन्होंने वहां मौजूद लोगों के साथ नर्सिंग की छात्राओं को संकल्प दिलाया कि वे थैलेसीमिया रोग को मुक्त कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाएंगे। मंत्री ने कहा कि जिले में सरकारी स्तर पर पंजीकृत 84 व निजी स्तर पर 20 थैलेसीमिया रोग से पीड़ित बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में 5037 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे हैं। 700 से अधिक बच्चों को बोन मेरो ट्रांसपलांट किया जा चुका है।
स्वास्थ्य में सुधार की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बेहतर काम हो रहा है। ऐसे में बेगूसराय में 100 से अधिक थैलेसीमिया का मरीज होना गंभीर बात है। इस कार्यक्रम को बेहतर तरीके से कराने के लिए डॉ. भव्या सरीन व डॉ. अमित गौरव को विशेष रूप से बधाई दी। मंत्री ने बच्चियों से सरवाइकल कैंसर से बचाव के लिए टिके लगाने की अपील की। विधान पार्षद सर्वेश कुमार ने कहा कि जिले में थैलेसीमिया रोग से मुक्ति के लिए क्या बुनियादी सुविधाएं होगी ताकि इसका इलाज बेगूसराय में आसान होगा। इसकी विस्तृत जानकारी सीएस देंगे तो वे इस मुद्दे को विधान परिषद में उठाएंगे।
थैलेसीमिया स्क्रीनिंग की आवश्यकता
सदर अस्पताल में खुले डे केयर सेंटर डॉ. भव्या सरीन ने कहा कि यदि शादी से पहले या गर्भाधारण से पहले लड़का व लड़की दोनों का थैलेसीमिया कैरियर टेस्ट हो जाय तो इस बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच में थैलेसीमिया स्क्रीनिंग को हर हाल में शामिल करनी चाहिए। विद्यालय से लेकर महाविद्यालय, सदर अस्पताल, पीएचसी व अन्य सरकारी अस्पताल में स्क्रीनिंग की सुविधा मिलने पर इस बीमारी की पहचान कर इसे रोका जा सकता है। उन्होंने सदर अस्पताल में हर हालत में एक डे केयर सेंटर खोलने का सुझाव केंद्री मंत्री, डीएम श्रीकांत शास्त्री, सीएस डॉ. अशोक कुमार को दिया। इन चिकित्सकों ने भी दिये सुझाव डॉ. कृपांशु भारद्वाज, डॉ. प्रशांत शांडिल्य, डॉ. प्राची, डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, डीएम श्रीकांत शास्त्री, सीएस डॉ. अशोक कुमार, डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. मृत्युंजय कुमार, डॉ. प्रशांत कश्यप, मेडिवर्सल के डॉ.ओम प्रकाश कुमार, डॉ. राजू कुमार आदि ने भी थैलेसीमिया रोग के लक्ष्ण, इससे होने वाली परेशानी, इसका इलाज की जानकारी दी।
कार्यक्रम का समापन
इन लोगों ने दीप प्रज्जवलन कर किया उदघाटन इससे पहले विश्व थैलेसीमिया दिवस का केंद्री मंत्री के अलावा डीएम श्रीकांत शास्त्री, सीएस डॉ.अशोक कुमार, डॉ. गोपाल मिश्रा, डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, एडीएम ब्रज किशोर सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव वर्मा आदि ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का दीप प्रज्जलित कर इसका उद्घाटन किया। वंदे भारत व बिहार गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएम श्रीकांत शास्त्री ने की। चिकित्सक समेत कई लोगों ने किया रक्तदान कार्यक्रम में रक्तदान शिविर का आयोजन किया। केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति में डॉ. अमित कुमार गौरव, डॉ.
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लेखक के बारे में
Manoj Kumar Sahniशॉर्ट बायो : मनोज कुमार सहनी पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के लिए बेगूसराय से रिपोर्टिंग करते हैं।
परिचय एवं अनुभव
वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के लिए नियमित तौर पर रिपोर्टिंग करते हैं। अपराध से जुड़ी घटनाओं पर विशेष पकड़। पिछले डेढ़ दशक से बेगूसराय जिले की पत्रकारिता में सक्रिय हैं।
कॅरियर का सफर
वर्ष 2002 में आज अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की। फिर प्रभात खबर से जुड़े। वर्तमान में हिन्दुस्तान के बेगूसराय जिला ब्यूरो टीम का हिस्सा हैं। क्राइम बीट को कवर करते हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग
बीएससी बायोलॉजी से स्नातक हैं। क्राइम, मेडिकल रिसर्च व हेल्थ बीट पर कमांड होने के साथ शिक्षा बीट पर भी पकड़ है।
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