
अनामांकित बच्चों की पहचान के लिए डोर टू डोर सर्वे
गढ़पुरा में शिक्षकों को अनामांकित और क्षितिज बच्चों की पहचान के लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण करना पड़ रहा है। प्रशिक्षण के तहत, सभी विद्यालयों के प्रधान अपने क्षेत्र में ऐसे बच्चों की जानकारी एकत्र कर रहे हैं। यह कार्य 20 दिसंबर तक पूरा करना है, जिससे सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ा जा सके।
गढ़पुरा, एक संवाददाता। प्रखंड क्षेत्र में अनामांकित व क्षितिज बच्चों की पहचान करने और उन्हें विद्यालय से जोड़ने के लिए शिक्षकों को डोर टू डोर जाना पड़ रहा है। प्रखंड की सभी सभी प्रकार के विद्यालय प्रधानों को विद्यालय के बाहर अनामांकित व क्षितिज बच्चों की पहचान के लिए गृहवार सर्वेक्षण को लेकर प्रशिक्षण दिया गया है। 20 दिसंबर तक यह कार्य हर हाल में पूरा कर लेना है। सभी विद्यालय अपने पोषक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घरों पर जाकर ऐसे बच्चों की पहचान कर रहे हैं। साथी ही अपने साथ ले गए रजिस्टरों में इन बच्चों का नाम भी दर्ज कर रहे हैं ।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में 6 से 19 वर्ष के सभी और नामांकित बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए शिक्षक डोर टू डोर जाकर जिला स्तर से उपलब्ध कराए गए प्रपत्र में सभी जरूरी जानकारी एकत्र कर निर्धारण समय सीमा के अंदर संकूल स्तर से प्रखंड में उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। बीते 15 दिसंबर को प्रखंड के सभी विद्यालयों के प्रधानों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया गया था। प्रखंड के सभी प्राथमिक और मध्य विद्यालय के शिक्षक अपने विद्यालय के पोषक क्षेत्रों में घर घर जाकर अनामांकित बच्चों की जानकारी जुटा रहे हैं। वहीं,इस संदर्भ में सर्वेक्षण कर रहे प्राथमिक विद्यालय राहुलनगर के प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने कहा कि अभी तक ऐसे आठ बच्चे मिले हैं जिसका नामांकन किसी भी विद्यालय में नहीं है। इधर , बीडीओ सह बीईओ विकास कुमार के द्वारा एक स्पेशल तकनीकी टीम का गठन किया गया है जो इस आंकड़े को सहेज कर रख रही हैं।

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