
गर्भवती महिलाओं में होने वाले मधुमेह की पहचान कर रोकना प्राथमिकता: सीएस
डायबिटीज को लेकर इंसुलिन एवं दवा प्रबंधन के गुर सीखे प्रतिभागी... सदर अस्पताल स्थित जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में जीडीएम कार्यक्रम पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण एकदिवसीय उन्मुखीकरण एवं समीक्षा...
बेगूसराय, निज प्रतिनिधि। सदर अस्पताल स्थित जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में जीडीएम कार्यक्रम पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण एकदिवसीय उन्मुखीकरण एवं समीक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला जिले में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने, गर्भावस्था के दौरान होने वाले मधुमेह की समय पर पहचान, प्रभावी प्रबंधन और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम साबित होगी। इसकी अध्यक्षता सीएस डॉ. अशोक कुमार ने की। इसमें जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से आए प्रतिनिधियों, सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, डेवलपमेंट पार्टनर्स तथा सदर अस्पताल के वरीय अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला के दौरान सभी प्रतिभागियों को जीडीएम कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति, चुनौतियां, कार्ययोजना, परीक्षण प्रक्रियाएं, रिपोर्टिंग प्रणाली तथा राज्य एवं राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुरूप किए जाने वाले सुधारात्मक उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।
सीएस ने कहा कि जिले में जीडीएम कार्यक्रम को और अधिक मजबूती से लागू करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। गर्भवती महिलाओं की समय पर स्क्रीनिंग, उपचार एवं फॉलो-अप सुनिश्चित करना न सिर्फ मातृ स्वास्थ्य बल्कि नवजात के सुरक्षित भविष्य के लिए भी आवश्यक है। स्वास्थ्यकर्मियों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे कार्यक्रम से जुड़े प्रत्येक प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं में होने वाले मधुमेह (जीडीएम) की समय पर पहचान करना, जोखिम ग्रस्त गर्भवती महिलाओं की सूचीकरण प्रक्रिया को मजबूत करना, स्वास्थ्यकर्मियों को अद्यतन दिशा निर्देशों एवं प्रोटोकॉल से परिचित कराना, सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परीक्षण उपकरणों, लॉजिस्टिक तथा रिपोर्टिंग व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना, जीडीएम के उपचार, फॉलो-अप और रेफरल प्रणाली को प्रभावी बनाना, जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में जीडीएम सेवा प्रसव को सुधारना है। कार्यक्रम में ग्लूकोमीटर संचालन से सटीक नमूना संग्रहण करने की दी गयी ट्रेनिंग कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण दल ने प्रतिभागियों के सामने कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्तुति दी। जीडीएम स्क्रीनिंग की प्रक्रिया, 24-28 सप्ताह की गर्भावस्था में नियमित रूप से ओजीटीटी परीक्षण, एक स्टेप टेस्टिंग प्रोटोकॉल, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की प्राथमिक पहचान, जीडीएम की रोकथाम एवं प्रबंधन, आहार प्रबंधन, जीवन शैली में सुधार, इंसुलिन एवं दवा प्रबंधन की जानकारी, नियमित फॉलो-अप की आवश्यकता, मरीजों के परामर्श की तकनीक, गर्भवती महिलाओं को मधुमेह से जुड़े जोखिमों के बारे में जागरूक करना, परिवार के सदस्यों को परामर्श देना, प्रसव पूर्व एवं प्रसवोत्तर देखभाल करने की जानकारी दी गयी। साथ ही प्रतिभागियों को परीक्षण किटों के उपयोग, ग्लूकोमीटर संचालन, सटीक नमूना संग्रहण विधि तथा रेफरल परिवहन सेवाओं की भी ट्रेनिंग दी गई।

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