मातहत काम करने वालों से भी करें बेहतर बर्ताव
खोदावंदपुर में मौलाना मोहम्मद मोइनुद्दीन ने रमज़ान के दौरान मातहतों और नौकरों के साथ नरमी से पेश आने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रमज़ान में सभी के साथ रहमदिली से पेश आना चाहिए, और जुल्म न करने की सलाह दी। इंसान को अल्लाह और उनके रसूल के रास्ते पर चलना चाहिए।

खोदावंदपुर, निज प्रतिनिधि। हुजूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि रमज़ान के महीने में अपने मातहत काम करने वाले लोगों और नौकर के साथ भी बेहतर बर्ताव करो। उनके साथ नरमी और रहमदिली के साथ पेश आने का हुक्म है। अगर मातहत काम करने वाले लोग रोज़ेदार नहीं भी हों तो उनके साथ नरमी और रहमदिली का बर्ताव करते हुए उनपर काम का बोझ नहीं डालना चाहिए। यह बात जामा मस्जिद नुरूल्लाहपुर के पूर्व इमाम मौलाना मोहम्मद मोइनुद्दीन साहब ने आठवें रमज़ानुलमुबारक के मौके पर गुरुवार को अपनी नूरानी तकरीर के दौरान कही। उन्होंने बताया कि खुदा ने रमज़ानुलमुबारक के महीने में सभी पर रियायत बरतने का हुक्म दिए हैं।
अगर कोई खुदा के बंदों के साथ हमदर्दी से पेश आता है, तो खुदा वैसे लोगों से खुश होते हैं। इमाम साहब ने कहा कि इंसान को चाहिए कि वह किसी पर भी जुल्म न करे। जुल्म करने वालों का गुनाह तब तक माफ नहीं होता, जबतक कि मजलूम (जिस व्यक्ति पर जुल्म हुआ हो) जुल्म करने वाले को दिल से माफ न कर दे। इमाम साहब ने कहा कि रमजानुलमुबारक के दौरान व उसके बाद भी हमें अल्लाह व उनके रसूल हजरत मुहम्मद साहब के द्वारा बताए गए रास्ते पर चल कर दीन व दुनिया में कामयाबी हासिल करनी चाहिए।
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