सब्र करने वालों के साथ अल्लाह का खास करम होता है
रमज़ानुलमुबारक का महीना सब्र और आत्मनियंत्रण का अवसर प्रदान करता है। पूर्व इमाम मौलाना मोहम्मद मोइनुद्दीन ने कहा कि रोज़ा इंसान को आत्मावलोकन और सुधार की दिशा में प्रेरित करता है। यह समय प्रेम, करुणा और भाईचारे का संदेश फैलाने का है। नेक काम करने वाले लोग अल्लाह के करीब होते हैं।

खोदावंदपुर, निज प्रतिनिधि। सब्र करने वालों के साथ अल्लाह का खास करम होता है। सब्र और शुक्र एक ऐसी चीज है, जो इंसान को अल्लाह से जोड़ती है। खुशकिस्मत हैं वह लोग जो अल्लाह के हुक्म को मानते हैं। रमज़ानुलमुबारक का महीना हम सबको नेकियों, आत्मसंयम और आत्मनियंत्रण का मौका देती है। यह मानव जाति को प्रेम, करुणा और भाईचारे का संदेश देता है। नफरत और हिंसा से भरे इस दौर में रमज़ान का संदेश पहले से और ज्यादा प्रासंगिक हो चला है। यह बात नुरूल्लाहपुर जामा मस्जिद के पूर्व इमाम मौलाना मुहम्मद मोइनुद्दीन साहब ने 10वें रमज़ानुलमुबारक के मौके पर शनिवार को कही।
उन्होंने बताया कि रोज़ा बन्दों को जब्ते नफ्स अर्थात आत्मनियंत्रण की तरबियत देता है और उनमें परहेजगारी अर्थात आत्मसंयम पैदा करता है। हम सब जिस्म और रूह दोनों के समन्वय के नतीजे हैं। आम तौर पर हमारा जीवन जिस्म की जरूरतों भूख, प्यास, शारिरिक सुख आदि के इर्द-गिर्द घूमता है। रमज़ान का महीना दुनियावी चीजों पर नियंत्रण रखने की साधना है। रोज़ा में परहेज, आत्मसंयम, सदाचार और पाकीजगी भी शर्त है। रमजानुलमुबारक आत्मावलोकरन व सुधार का देता है मौका रमजानुलमुबारक रोज़ेदारों को आत्मावलोकन और खुद में सुधार का मौका देता है। हम दूसरों को नसीहत देने के बजाय अगर अपनी कमियों को पहचान कर उन्हें दूर कर सकें तो हमारा दीन और दुनिया ज्यादा बेहतर होगा। कुरान-ए-करीम में आया है कि अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है। इमाम साहब ने कहा कि नेक बंदे हमेशा सब्र के साथ अल्लाह से उम्मीद लगाए रहते हैं। नेक बंदे अपने जीवन में खुदा के जरिये अताकरदा तहाएफ (गिफ्ट) का इस्तेमाल करते हुए विश्व कल्याण की बात सोचते हैं। नेक बंदों के होंठों पर सच, चेहरे पर मुस्कुराहट, अल्फाज़ में दुआ, आंखों में दूसरों के लिए हमदर्दी, दिल में सभी के लिए मुहब्बत, हाथों में खिदमत और फितरत में आजज़ी होती है। रोजा रोजेदारों को सब्र करने की देता है सीख उन्होंने कहा कि रमज़ानुलमुबारक का रोज़ा रोज़ेदारों को सब्र करने की सीख देता है। यह रोज़ेदारों के लिए पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। रमज़ान के महीने में अल्लाह व उनके रसूल हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताए गए तरीके पर अम्ल करते हुए जो भी अपनी जिंदगी गुजारेगा, वह दोनों जहान में कामयाब होगा। इमाम साहब ने कहा कि रमजानुलमुबारक का पहला अशरा (प्रथम दस दिन) आज संपन्न हो गया। रविवार से मगफिरत वाला दूसरा अशरा शुरु होगा। इस दौरान जो शख्स रमज़ानुलमुबारक का एहतराम करते हुए पूरे तकवा के साथ रोज़ा, नमाज़, कुरान-ए-करीम की तिलावत व इबादत में अपने आपको मशगूल रखेगा, वह खुदा के सामने अफजल बन्दे की श्रेणी में गिना जाएगा। इस लिए रमजानुलमुबारक के पाक दिनों में रोज़ा व नमाज़ की पाबंदी कर अपने गुनाहों से माफी व बेहतर जिंदगी के लिए दुआ करें।
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