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लग्न की तेजी से डाला-दउरा बनाने वाले कारीगरों के दिन बहुरे

लग्न की तेजी से डाला-दउरा बनाने वाले कारीगरों के दिन बहुरे

संक्षेप:

शुभ लग्न तेज होने के कारण इसकी मांग बढ़ गई है टोल गांव में लग्न के लिए डाला-दउरा बनाने के लिए बांस की कमची निकालते महादलित परिवार की अनीता देवी व अ

Nov 18, 2025 07:50 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बेगुसराय
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गढ़पुरा, एक संवाददाता। देवोत्थान के बाद शुभ लग्न तेज होने से डाला दउरा बनाने वाले महादलितों के दिन बहुरे हैं। उनके यहां इस समय एक से एक लोग पहुंच कर डाला-दउरा की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें मूल्य नहीं बल्कि बख्शीश देने पड़ रहे हैं। सोमवार को शादी विवाह के लिए डाला दउरा बना रहे महादलित परिवार द्वारा बताया गया कि शुभ लग्न तेज होने के कारण इसकी मांग बढ़ गई है। इसके लिए लोग पहले से बुकिंग कर रहे हैं। शादी विवाह में डाल दउरा का अहम जरूरी होता है। इस कारण इसे लोग खरीद कर नहीं बल्कि बख्शीश देकर ले जाते हैं।

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गढ़पुरा के कुम्हारसो पंचायत के कुवंरटोल महादलित परिवार की अनीता देवी ने बताया कि शुभ लग्न में यह डाला दउरा की अहम भूमिका होती है। इसके लिए वह रंग-बिरंगे डाला दउरा का निर्माण करते हैं। इसमें उनकी कारीगरी भी दिखती है। वह उसे रंग बिरंगी और आकर्षक रूप में बनाते हैं। इसके निर्माण में उनकी अच्छी कलाकारी भी दिखती है। दूल्हे के बहन या जीजा बख्शीश देकर ले जाते हैं डाला-दउरा शादी विवाह में डाला दउरा खासकर बहन या जीजा के द्वारा दी जाती है। इसके कारण महादलित परिवार के यहां इसकी खरीदारी करने पहुंचने वाले से मूल्य नहीं बल्कि बख्शीश की मांग की जाती है। इसी तरह दूल्हे का टोपी, मौरी, माला आदि भी दूल्हे के बहन या जीजा या अन्य संबंधी द्वारा ही दी जाती है। इसके कारण शुभ सामान बेचने वाले इसकी कीमत नहीं बल्कि बख्शीश लेते हैं। इस समय महादलित परिवार के घर पर लग्जरी गाड़ियों से लोग पहुंच कर डाला-दउरा के लिए उनकी खुशामद करते हैं। ऐसे तो का मिथिला पंचांग के अनुसार शुभ लग्न 20 नवंबर से हो रहा है। हालांकि देवोत्थान के साथ ही शुभ लग्न की तेजी होने से शादी विवाह रफ्तार पकड़ ली है। इस समय चारों ओर लाउडस्पीकर से शुभ लग्न के मंगलगान लोगों को सुनाई दे रहे हैं। शुभ लग्न होने के कारण चारों ओर शादियों के माहौल के साथ लोगों में खुशी का आलम है। कहीं शादियां हो रही हैं तो कहीं रिंग शेरोमणि तो कहीं शुभ तिलकोत्सव चल रहा है तो कहीं छेंका-फलदान। इसी के साथ बाबा भुइंया की पूजा भी हो रही है।