
नववर्ष के दूसरे दिन भी नौकायन के लिए सैलानियों की उमड़ी भीड़
प्रादेशिक व फ्लायर::::::नौकायन से राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटक केंद्र के रूप में उभर रहा है रामसर साइट कावर झील लिए दूर-दूर से पहुंचे सैलानी व श्रद्धालु फोटो नं. 09, नववर्ष के दूसरे दिन शुक्रवार को कावर...
मंझौल, एक संवाददाता। नव वर्ष के दूसरे दिन शुक्रवार को कावर झील में नौकायन के लिए सैलानियों एवं पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ी। नववर्ष के अवसर पर प्रशासन के द्वारा सुरक्षा कारणों से एक जनवरी को दिनभर के लिए रामसर साइट कावर झील में नौकायन पर प्रतिबंध लगाया गया था। नव वर्ष के अवसर पर झील में नौकायन पर प्रतिबंध लगाने से सैलानियों को काफी निराशा हुई थी। दूर-दूर से आए सैलानियों ने बताया कि यूट्यूब पर कावर झील में नौकायन का दृश्य देखकर ही वे कावर झील में नौकायन करने एवं प्रवासी पक्षियों को देखने आए हैं। नौकायन के कारण कावर झील राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो रहा है।
वॉच टावर से प्रवासी मेहमान साइबेरियन पक्षियों को देखने एवं नौकायन का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में राज्य एवं देश के विभिन्न भागों से वर्षभर पर्यटक आते रहे हैं। मीठे पानी का कावर झील सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। दूर-दूर के सैलानी कावर झील में नौकायन का आनंद लेने के लिए आ रहे हैं। ऐतिहासिक जयमंगलागढ़ में दुल्हन की तरह सजी-धजी 40 नौकाएं सैलानियों को आकर्षित कर रही हैं। कावर झील पक्षी मौजूदा स्थिति में बिहार का डल झील साबित हो रहा है। सुरक्षा कारणों से अब सैलानी व पर्यटक डल झील की तरफ बहुत कम जा रहे हैं। कश्मीर के डल झील के विकल्प के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर कावर झील उभर रहा है। कावर झील में लगातार सैलानियों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। नौकायन के कारण जहां एक तरफ मछुआरों को रोजगार मिल गया है वहीं झील के किनारे खाने-पीने के सामानों की कई दुकानें खुल गई हैं। एशिया प्रसिद्ध कावर झील मीठे पानी की गोखुर झील है। कावर झील के उत्तर में चंद्रभागा नदी प्रवाहित होती थी जबकि दक्षिण में बूढ़ी गंडक नदी प्रवाहित होती है। इस वर्ष अच्छी वर्षा के कारण झील में पानी का स्तर अच्छा है जिसके कारण नौकायन एक व्यवसाय के रूप में उभर रहा है। झील का प्राकृतिक सौंदर्य काफी मनोरम है। झील में विभिन्न तरह के कमल एवं वनस्पतियाँ मौजूद हैं। सरकार झील के सौंदर्यीकरण एवं विकास के लिए विभिन्न तरह की योजनाओं की घोषणा कर चुकी है। मंदिर के पुजारी पुतुल शर्मा के अनुसार इस वर्ष मौसम सुहाना रहने के कारण लगभग डेढ़ लाख लोग जयमंगला माता की पूजा-अर्चना करने एवं कावर झील पिकनिक मनाने आए हुए थे। अन्य वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष लोगों की संख्या बहुत अधिक थी। मंदिर नवनिर्माण के बाद 52 शक्तिपीठों में यह ऐतिहासिक स्थल जयमंगलागढ़ श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केन्द्र बना हुआ है। दूसरे दिन शुक्रवार को भी जयमंगलागढ़ में पूजा-अर्चना करने व कावर क्षेत्र भ्रमण के लिए दूर-दूर से आए सैलानी एवं श्रद्धालुओं के कारण निजी वाहनों की लंबी कतारें दूसरे दिन भी लगी रहीं।

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