
प्रखंडों में संचालित कुल 35 आंगनबाड़ी केंद्रों का होगा अपना स्थायी भवन
लीड युवा पेज::::::::: लब्ध होगा मनरेगा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी की अध्यक्षता में सोमवार को उनके कार्यालय प्रकोष्ठ में हुई महत्वपूर्ण बैठक फोटो नंबर: नौ, मनरेगा भवन के निर्माण के सिलसिले में...
बेगूसराय, हमारे प्रतिनिधि। जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित कुल 35 आंगनबाड़ी केंद्रों को अब अपना स्थायी भवन मिलने जा रहा है। नाबार्ड की ओर से स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सभी भवनों का निर्माण आधुनिक बाला मॉडल (बिल्डिंग एज लर्निंग एड) पर किया जाएगा। ताकि आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों को पढ़ाई, खेल एवं गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध हो सके। प्रत्येक भवन के निर्माण पर लगभग 12 लाख रुपये का व्यय निर्धारित किया गया है। इस योजना की निगरानी प्रखंड बाल विकास परियोजना पदाधिकारी तथा मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी संयुक्त रूप से करेंगे। मंगलवार को मनरेगा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी बिट्टू कुमार सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को उनके कार्यालय प्रकोष्ठ में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।

बैठक में मनरेगा के कनीय अभियंता, पंचायत तकनीकी सहायक एवं संबंधित कर्मियों को चयनित स्थलों के अनुसार भूमि, डिज़ाइन एवं निर्माण से जुड़े कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया गया। वर्तमान में स्थिति आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जिले में इस समय कुल 3360 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें केवल 487 केंद्रों के पास अपना भवन है। वहीं 475 केंद्र अन्य सरकारी भवनों में तो 2190 आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों में चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा 208 केंद्र विभिन्न स्कूल परिसरों में संचालित होते हैं। ऐसे में 35 नए भवनों का निर्माण जिले की आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूती देगा। भवन बनने से क्या फायदा होगा? स्थायी भवन मिलने से आंगनबाड़ी केंद्रों में सेवाएं और भी सुचारू हो जाएंगी। अब तक किराए या जर्जर भवनों में चलने वाले केंद्रों को सुरक्षित एवं स्थायी संरचना मिलने से बच्चों तथा महिलाओं, दोनों को सुविधा होगी। बाला मॉडल के तहत बनाए जा रहे भवनों में दीवारें, फर्श और बाहरी भाग को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे बच्चों को पढ़ने, पहचानने और सीखने में स्वयं शिक्षण सामग्री की तरह काम करें। नए भवनों में शौचालय, पेयजल, साफ-सफाई और सुरक्षित खेल-क्षेत्र जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इससे पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा तथा स्वास्थ्य जांच जैसी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भवन निर्माण से आंगनबाड़ी केंद्रों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और नामांकन में भी वृद्धि होगी। कहां-कहां होगा आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण मंसूरचक प्रखंड की गोविंदपुर पंचायत एक एक के गोविंदपुर कोठी, बहरामपुर पंचायत के बटौआ पर, समसा दो के नवटोल व मकदमपुर, डंडारी प्रखंड की उत्तरी कटरमाला के मिल्की मुसहरी टोल, महिपाटोल के पासवान टोला पचरूखी व दासटोला कल ्याणपुर, दक्षिणी कटरमाला के लरहा बलहा सात, बलिया प्रखंड की भगतपुर पंचायत के तांती टोला व बलिया नगर परिषद के बलिया लखमिनिया दो व मंसूरचक पश्चिम टोल, वीरपुर प्रखंड की वीरपुर पश्चिमी के दिलीप चौधरी का दरवाजा, गेन्हरपुर के छठ्ठू पंडित का दरवाजा, अमर सिंह कर दरवाजा, गढ़पुरा प्रखंड की सोनाम के सानेमा मुसहरी टोला, कोरेय के वार्ड नौ, मौजी हरिसिंह के वार्ड एक मौजी हरिसिंह व कोरेय के रामप्रप्रकाश शर्मा के दरवाजे पर ये केंद्र संचालित हैं। इसी तरह बरौनी की सिमरिया पंचायत दो के अरुा कुमार रजक का दरवाजा, नींगा के मो. इबीन का दरवाजा, बथौली के मोतिउर रहमान का दरवाजा, मल्हीपुर दक्षिणी के रामविलास निषाद का दरवाजा, मल्हीपुर उत्तर के विंदेश्वरी सिंह का दरवाजा, केशावे के विंदेश्वरी राय का दरवाजा व सिमरिया दो के कसहा बिंदटोली, साहेबपुरकमाल प्रखंड की सादपुर पूर्वी के राजेंद्र तांती का दरवाजा, विष्णुपुर आहोक के अनिल सिंह का दरवाजा, पप्पू सिंह का दरवाजा, रघुनाथपुर करारी के राजेश कुमार का दरवाजा, विष्णुपुर आहोक के शाहजहां का दरवाजा, रहुआ के सामुदायिक भवन, पैक्स भवन व चौकी में अनुसूचित टोला बैठका स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को नया भवन मिलेगा।

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