
बुनियादी विद्यालय में तीन सौ विद्यार्थियों की पढ़ाई दो शिक्षकों के भरोसे
तेघड़ा का मामलाअभिभावकों व विद्यार्थियों में मायूसी फोटो नं. 04, तेघड़ा स्थित बुनियादी विद्यालय बजलपुरा का भव्य स्कूल कैंपस। ते
तेघड़ा, निज प्रतिनिधि। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाके के विभिन्न स्कूल शिक्षकों से गुलजार हुए लेकिन बजलपुरा बुनियादी विद्यालय की तस्वीर नहीं बदल पायी है। नतीजा यह है कि छात्रों को पर्याप्त शिक्षक नहीं मिल पाते हैं। इससे उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। नगर परिषद क्षेत्र के बजलपुरा स्थित बुनियादी विद्यालय को देखकर अभिभावकों का दिल बैठा जा रहा है। लगभग तीन सौ छात्रों का नामांकन रहने के बावजूद एचएम सहित दो शिक्षक ही स्कूल में कार्यरत हैं। इससे स्कूल का अन्य काम भी प्रभावित हो रहा है। इस मामले में विभाग व सरकार के उदासीन रवैये के प्रति अभिभावकों में जबरदस्त नाराजगी है।

कई लोगों ने बताया कि बुनियादी विद्यालय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों का स्कूल था। लेकिन, विभाग व सरकार की उदासीनता के कारण यह स्कूल बंद होने के कगार पर है। ग्रामीण अरुण सिंह, अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह, गरीबनाथ उर्फ कारी मुंशी सहित कई लोगों ने बताया कि बुनियादी विद्यालय की स्थापना करने का उद्देश्य ग्रामीण परिवेश में पढ़ाई के साथ-साथ खेतीबारी और कृषि से जुड़े कार्य के बारे में बच्चों को पढ़ाने का काम किया जाएगा। लेकिन, धीरे-धीरे बुनियादी विद्यालय को उपेक्षित किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि स्कूल के पास पर्याप्त जमीन है लेकिन संसाधन के अभाव में स्कूल व विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। ग्रामीणों ने इसी विद्यालय को प्लस टू का दर्जा देने की मांग की है ताकि आसपास के सैकड़ों बच्चे भी यहां पढ़ाई कर पाएं। इसके लिए ग्रामीण अरुण सिंह सहित कई लोगों की टीम लगातार अधिकारियों के साथ ही सांसद व विधायक से बात कर रही है। अरुण सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र के बच्चे श्री विश्वेश्वर राष्ट्रीय स्कूल पढ़ने जाते हैं। उसकी दूरी बजलपुरा से दो किलोमीटर है। अगर बजलपुरा बुनियादी विद्यालय को प्लस टू का दर्जा मिल जाता तो राष्ट्रीय स्कूल पर भार भी कम होता। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों डीएम के द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था। कुछ दिनों पूर्व भी डीडीसी द्वारा भी स्पॉट वेरिफिकेशन किया गया था लेकिन अब तक बजलपुरा बुनियादी विद्यालय को अपग्रेड करने व शिक्षकों की पदस्थापना के मामले में कोई पहल नहीं किए जाने से अभिभावकों व विद्यार्थियों में मायूसी है।

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