
मुठभेड़ नहीं, दयानंद मालाकार की गई सुनियोजित हत्या: माले
भाकपा (माले) की ओर से गठित पांच सदस्यीय जांच दल ने किया नोनपुर का दौराकि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला तो व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा फोटो नं.04, तेघड़ा प्रखंड के नोनपुर गां
बेगूसराय, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। तेघड़ा प्रखंड के नोनपुर गांव में दयानंद मालाकार की हुई हत्या को भाकपा (माले) ने सुनियोजित फर्जी मुठभेड़ करार दिया है। पार्टी की ओर से गठित पांच सदस्यीय जांच दल में पार्टी नेता नवल किशोर सिंह, चंद्रदेव वर्मा, बैजू सिंह, सुजीत सिंह कुशवाहा और सोनू फर्नाज शामिल थे। टीम ने गांव पहुंचकर घटनास्थल और ग्रामीणों से बातचीत कर तथ्यों की गहन जांच-पड़ताल की। जांच में सामने आया कि दयानंद मालाकार अपने आवास पर अलाव ताप रहे थे। तभी एसटीएफ ने दल-बल के साथ उनके घर को घेर लिया। चार पुलिसकर्मियों ने घर में प्रवेश कर उन्हें पकड़ लिया और कपड़े उतरवाकर निर्माणाधीन मकान में ले गए।
वहां दस्ताने पहनकर पहले सिर में और फिर छाती में चार गोलियां मारकर उनकी निर्मम हत्या कर दी गई। इसके बाद पुलिस बल ने निर्माणाधीन मकान पर चढ़कर लगातार हवाई फायरिंग की और शव को वहीं छोड़ दिया। बाद में जिला एसपी मनीष कुमार और तेघड़ा एसडीपीओ घटनास्थल पर पहुंचे। जांच दल ने पाया कि घटनास्थल या आसपास किसी भी दीवार पर गोली के निशान नहीं हैं, जिससे मुठभेड़ की कहानी पूरी तरह झूठी साबित होती है। गांव के लोगों ने भी जांच दल को एकमत से किसी प्रकार की मुठभेड़ से इनकार किया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दयानंद मालाकार की हत्या के बाद पुलिस द्वारा एक बोलेरो वाहन से हथियार लाकर शव के पास रखकर फोटो खिंचवाया गया। मृतक की पत्नी, बेटे और एक मजदूर को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, ग्रामीणों के दबाव के बाद बेटे को रिहा करना पड़ा लेकिन पत्नी और एक मजदूर को जेल भेज दिया गया है। जांच में यह भी उजागर हुआ कि गांव में पांच बीघा जमीन पर दलित और गरीब परिवार वर्षों से झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं जबकि तीन बीघा जमीन को गांव के नौजवान खेल मैदान के रूप में उपयोग करते हैं। इस जमीन को खाली कराकर बेचने की मंशा से भू माफिया तत्वों द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। भाकपा माले का आरोप है कि इसी साजिश के तहत एसटीएफ और जिला पुलिस ने मिलकर दयानंद मालाकार की हत्या की ताकि दलित-गरीबों में दहशत पैदा की जा सके। पार्टी ने कहा कि जिले में चोरी, डकैती, बलात्कार, अपहरण और हत्या की लगातार घटनाओं को लेकर पुलिस की भारी आलोचना हो रही थी। उसी आलोचना से ध्यान भटकाने के लिए मुख्यधारा से जुड़कर जीवनयापन कर रहे दयानंद की नृशंस हत्या कर दी गई। भाकपा (माले) इस घटना की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच, दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी व सख्त कार्रवाई, पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवजा तथा दलित-गरीबों की जमीन व जीवन की सुरक्षा की गारंटी की मांग करती है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला तो व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा।

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