सफदर हाशमी ने रंगमंच को महलों से निकालकर सड़कों तक पहुंचाया: दीपक
फोटो न. 04, शहर के दिनकर कला भवन परिसर में शहीद रंगकर्मी सफदर हाशमी की स्मृति में आयोज्य कार्यक्रम में जुटे रंगकर्मी।

बेगूसराय, हिंदुस्तान प्रतिनिधि। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से दिनकर कला भवन परिसर में शहीद रंगकर्मी और जननाट्य आंदोलन के प्रतीक सफदर हाशमी की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में रंगमंच, गीत, कविता और विचार गोष्ठी के माध्यम से सफदर हाशमी के वैचारिक योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत रंगनायक द थियेटर के कलाकार देवेंद्र कुंवर के जनगीत से हुई। इसके बाद रंगकर्मी चंदन वत्स ने शहीद गान “उनको सलाम कहना” प्रस्तुत कर माहौल को भावुक बना दिया। शिक्षाविद् मुकेश कुमार ने काव्य पाठ किया। कमल वत्स की ओर से “संविधान बचाओ, देश बचाओ” विषय पर बुक स्टॉल भी लगाया गया, जिसे लोगों ने सराहा।
इस अवसर पर “सफदर हाशमी का रंगमंच और हमारा आज का रंगमंच” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। जसम के राज्य सचिव दीपक सिन्हा ने कहा कि सफदर को याद करना केवल एक व्यक्ति को याद करना नहीं, बल्कि एक पूरे संघर्षशील दौर को याद करना है। उन्होंने कहा कि सफदर हाशमी ने रंगमंच को महलों से निकालकर सड़कों तक पहुंचाया और नुक्कड़ नाटक को जन-संघर्ष का औजार बनाया। आज का रंगमंच जनता से दूर क्यों हो गया है, इस पर गंभीर समीक्षा की आवश्यकता है। युवा रंगनिर्देशक इम्तियाजुल हक डब्लू ने कहा कि सफदर का रंगमंच शोषित-वंचितों की आवाज था, जो सत्ता, शोषण और असमानता पर सीधा प्रहार करता था। एक्टिविस्ट कमल वत्स ने कहा कि 1973 में स्थापित जन नाट्य मंच (जनम) के माध्यम से उन्होंने भारतीय नुक्कड़ नाटक आंदोलन को नई दिशा दी। उन्होंने याद दिलाया कि सफदर की हत्या के दो दिन बाद ही उसी स्थान पर नाटक हल्ला बोल का मंचन किया गया था। पत्रकार सह कवि प्रवीण प्रियदर्शी ने कहा कि सफदर के लिए असली दर्शक मजदूर, किसान और आम लोग थे। जसम के अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि उन्होंने लोकगीत, दस्तानगोई जैसी लोक कलाओं को नाटकों में शामिल कर उन्हें और प्रभावी बनाया। अन्य वक्ताओं ने भी सफदर हाशमी को लोकतंत्र, जनसंघर्ष और सांस्कृतिक आंदोलन का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में यह भी घोषणा की गई कि फरवरी माह में जसम द्वारा नुक्कड़ लाइव थिएटर फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में रंगकर्मी हरिकिशोर ठाकुर , राजाराम आर्य, पंकज कुमार सिन्हा, डी एन ब्रह्मचारी, राजू सिन्हा,भारत भूषण मिश्रा,मो. तनवीर,नीलेश झा,रामपुकार दास, राहुल कुमार,रंजन कुमार,वरिष्ठ रंगकर्मी अरविंद कुमार सिन्हा,आरवाईए के संजय ठाकुर,पंकज कुमार सहित बड़ी संख्या में रंगकर्मी, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित रहे।

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