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निजी स्कूलों में आरटीई के मानकों की होगी जांच, डीपीओ ने दिया आदेश

निजी स्कूलों में आरटीई के मानकों की होगी जांच, डीपीओ ने दिया आदेश

संक्षेप:

लीड युवा पेज::::::: की सुरक्षा से जुड़े इंतजाम और बुनियादी सुविधाओं की भी गहन समीक्षा की जाएगी जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि निजी विद्यालयों के पास वैध मान्यता है या नहीं यह कार्रवाई एक लिखित...

Jan 04, 2026 07:21 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बेगुसराय
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बेगूसराय, हमारे प्रतिनिधि। जिले में बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले में संचालित निजी विद्यालयों की जांच को लेकर सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने सभी प्रखंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया है। इस पत्र में निर्देश दिया गया है कि निजी विद्यालयों की आरटीई अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों के आधार पर जांच कराई जाए। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि निजी विद्यालयों के पास वैध मान्यता है या नहीं। भवन सुरक्षित है या नहीं, स्कूल में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षक हैं या नहीं।

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छात्र-शिक्षक अनुपात तय मानकों के अनुसार है या नहीं। इसके अलावा विद्यालयों में शौचालय, पेयजल, अग्नि सुरक्षा, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इंतजाम और बुनियादी सुविधाओं की भी गहन समीक्षा की जाएगी। बताया गया है कि यह कार्रवाई एक लिखित शिकायत के आधार पर की गई है। इसमें यह आरोप लगाया गया है कि जिले में कई निजी विद्यालय बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया था कि कुछ स्कूल आरटीई अधिनियम की अनदेखी करते हुए मनमानी फीस वसूल रहे हैं और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। डीपीओ द्वारा जारी पत्र में सभी बीईओ को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने प्रखंडों में संचालित निजी विद्यालयों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित समय के भीतर जिला कार्यालय को सौंपें। जांच में यदि किसी विद्यालय द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद निजी विद्यालय संचालकों के बीच खलबली मच गई है। अभिभावकों को उम्मीद है कि इस पहल से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और बच्चों को सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का माहौल मिलेगा। शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष और गंभीरता से की गई तो इससे न केवल नियमों की अनदेखी करने वाले विद्यालयों पर अंकुश लगेगा, बल्कि ईमानदारी से काम कर रहे स्कूलों को भी मजबूती मिलेगी। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।