धरोहरों का संरक्षण केवल जिम्मेदारी ही नहीं, सांस्कृतिक विरासत के प्रति कर्तव्य भी: डॉ. भैरव
बेगूसराय की विरासत पर सार्थक विमर्श, इंटैक बेगूसराय चैप्टर गठन की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआतडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज बिहार चैप्टर की ओर से परिचर्चा का उद्घाटन करते उद्घाटन इंटैक

बेगूसराय, हमारे प्रतिनिधि। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) बिहार चैप्टर एवं भारद्वाज गुरुकुल पन्हास की ओर से रविवार को बेगूसराय की विरासत विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। भारद्वाज गुरुकुल में हुए कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सभी मूर्त व अमूर्त धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा संगठित प्रयासों की दिशा तय करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन इंटैक के राज्य समन्वयक डॉ. भैरव लाल दास, हैरिटेज एक्सपर्ट डॉ. शिवकुमार मिश्र, जिला संस्कृति अधिकारी श्याम कुमार सहनी एवं आयोजक शिवप्रकाश भारद्वाज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। अध्यक्षता अवकाश प्राप्त शिक्षक डॉ. भगवान प्रसाद सिन्हा ने की,जबकि संचालन राजकीय शिक्षक सम्मान प्राप्त शिक्षक अनुपमा सिंह किया।
इस अवसर पर शिक्षा, चिकित्सा, व्यवसाय एवं शोध क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों तथा धरोहर प्रेमियों ने इंटैक बेगूसराय चैप्टर की सदस्यता ग्रहण की। बताया गया कि नेशनल चैप्टर से स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत शीघ्र ही बेगूसराय चैप्टर का विधिवत उद्घाटन किया जाएगा। डॉ. भैरव लाल दास ने कहा कि हमारे आसपास मौजूद धरोहरों का संरक्षण केवल जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रति कर्तव्य भी है। डॉ. शिवकुमार मिश्र ने जानकारी दी कि इंटैक बिहार द्वारा छठ पर्व को अमूर्त विश्व विरासत के रूप में मान्यता दिलाने के लिए यूनेस्को से आवश्यक संवाद स्थापित किया जा रहा है। डॉ. भगवान प्रसाद सिन्हा ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी में जागरूकता के अभाव के कारण कई महत्वपूर्ण धरोहर उपेक्षित हो रही हैं। उन्होंने बीपी स्कूल के हॉस्टल को स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महत्वपूर्ण धरोहर स्थल के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने 1931 के स्वतंत्रता आंदोलन में टेढ़ीनाथ मंदिर चौक पर बेगूसराय के छह युवाओं की शहादत तथा पंचमार्क सिक्कों के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। शिवप्रकाश भारद्वाज ने कहा कि प्रत्येक गांव के मुख्य द्वार पर स्थानीय धरोहरों से संबंधित शिलालेख लगाए जाने चाहिए। उन्होंने मंगल गीत, लोरी, अहरायन एवं प्राती जैसी लोक-सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम में चिकित्सक डॉ. संजय कुमार, डॉ. शशिकांत पाण्डेय, पुष्पराज, धनंजय कुमार, कामिनी कुमारी, कुमारी निरुपमा, डॉ. कुंदन कुमार, डॉ. प्रशांत रंजन कुमार, नीरज देव, मनीष कुमार कौशिक, इंद्रमोहन प्रसाद, चंदन कुमार, नितिन कुमार, अजय आशीष आदि थे। रिपोर्टर:प्रवीण कुमार
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