किशोर के मूत्राशय में कैथेटर लगाने के लिए मरीज को देने पर 1500 रुपये

Newswrap हिन्दुस्तान, बेगुसराय
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सदर अस्पताल के आईसीयू में स्वास्थ्यकर्मी नहीं लगा सका कैथेटर, निजी अस्पताल के एक्सपर्ट का लेना पड़ा सहारा टर, निजी अस्पताल के एक्सपर्ट का लेना पड़ा सहारा आईसीयू में मरीज की इलाज के लिए निजी क्लिनिक...

किशोर के मूत्राशय में कैथेटर लगाने के लिए मरीज को देने पर 1500 रुपये

बेगूसराय, निज प्रतिनिधि। सदर अस्पताल के आईसीयू में तेघड़ा प्रखंड के पिढ़ौली गांव निवासी लालू पासवान के 13 वर्षीय पुत्र आशिक कुमार के पैशाब नली में कैथेटर लगाने में स्वास्थ्यकर्मी सक्ष्म नहीं सके। जबकि मरीज थैले में पैशाब भरने से परेशान रहे। दर्द से परेशान मरीज के मूत्राशय में कैथेटर लगाने के लिए एक निजी क्लीनिक का सहारा लेना पड़ा। 1500 रुपये मरीज के अभिभावक से लेने के बाद ही कैथेटर लगाया गया। उसके बाद मरीज को राहत मिली। जहां आईसीयू में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर पाबंदी रहती है वहां निजी क्लीनिक के कर्मियों को खुलेआम प्रवेश कराया गया। उसके बाद मरीज का कैथेटर बदलकर अभिभावक से 1500 रुपये लेकर चलते बने।

इस घटना के बाद बिहार में नंबर एक स्पताल का दावा करने वाली सदर अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता की पोल खुल गयी। मरीज के पिता ने बताया कि शहर के चार से अधिक चिकित्स्कों से इलाज कराने के बाद अपने पुत्र को इलाज के लिए आईसीयू में भर्ती कराया। सोमवार को आशिक की स्थिति बिगड़ने लगी। चिकित्सक से लेकर नर्स को बार-बार कहा गया कि उसके पैशाब नली से पैशाब बाहर नहीं आ रहा है। मरीज के पिता के अनुसार नर्स के द्वारा साफ कहा गया कि उन्हें पैशाब नली में कैथेटर लगाने नहीं आता है। कहीं से व्यवस्था कीजिए। उसके बाद वह तीन घंटे तक इंतजार किया। जब चिकित्सक से लेकर कोई भी नर्स कैथेटर लगाने नहीं आया तो शाम में एक निजी क्लीनिक को फोन किया गया। उसके बाद निजी क्लीनिक का एक कंपाण्डर आया व कैथेटर लगाया। बदले में कंपाण्डर ने 1500 रुपये लिया। मरीज के पिता के अनुसार उसके पुत्र का इलाज बेहतर ढंग से हो सिविल सर्जन व डीएस इस पर ध्यान दे। कहते हैं अधिकारी किसी नर्स को कैथेटर लगाने नहीं आना यह गंभीर सवाल है। साथ ही कैथेटर लगाने के लिए मरीज के अभिभावक से 1500 रुपये लिये गये। यह जानकारी मुझ तक आयी। उसके बाद स्टॉक में पता किया गया किशोर को जितने नंबर का कैथेटर लगना था वह उपलब्ध है कि नहीं। लेकिन स्टॉक में सभी प्रकार के नंबर वाला कैथेटर उपलब्ध है। यह दर्शाता है कि स्वास्थ्यकर्मियों के द्वारा लापरवाही बरती गयी। आईसीयू प्रभारी को भी जबाव देना होगा कि आखिरकार निजी क्लीनिक के कंपाण्डर को आईसीयू में प्रवेश के लिए अनुमति किसने दी। मामले की जांच होगी। आईसीयू में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है। उसके बाद विधि सम्मत कार्रवाई होगी। डॉ. अखिलेश कुमार, डीएस

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