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20 वर्षों से राजकीय नलकूप नाकारा, निजी पंपसेट से पटवन की विवशता

लीड पेज 4:::::::: रविवार को पंपसेट के जरिए खेतों का पटवन करते किसान। बछवाड़ा, निज संवाददाता। रबी खेती कर रहे...

20 वर्षों से राजकीय नलकूप नाकारा, निजी पंपसेट से पटवन की विवशता
हिन्दुस्तान टीम,बेगुसरायSun, 03 Dec 2023 08:00 PM
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बछवाड़ा, निज संवाददाता। रबी खेती कर रहे किसानों को फसलों का पटवन करने में आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। फसलों के पौध जमीन से बाहर निकलते ही खेतों में पहला पटवन करने की जरूरत पड़ रही है। सरकारी स्तर से सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण अधिकतर किसानों को आज भी महंगी दर पर डीजल खरीद कर पंपसेट के जरिए ही खेतों का पटवन करना पड़ रहा है। किसानों को पंपसेट के जरिए खेतों की सिंचाई करने में तकरीबन 200 रुपये प्रति घंटे की दर से खर्च करने की नौबत उत्पन्न हो रही है।
झमटिया के अमरनाथ कुमर, राजकुमार चौधरी, रामनरेश चौधरी, रामराजी राय, गोधना के राजीव चौधरी समेत कई किसानों ने बताया कि इस साल खेतों में समुचित नमी नहीं रहने के कारण बोआई के पहले भी खेतों का पटवन करना पड़ा। जिन खेतों में सिंचाई किए बगैर बीजों की बुआई की गई है उनमें बीजों के अंकुरण पर संकट की स्थिति बनी हुई है। खेतों के पटवन के बाद ही फसलों के पौध जमीन से बाहर निकल रहे हैं। किसानों ने कहा कि उन्हें प्रति बीघा खेतों का पटवन करने में 8 से 10 घंटे लग रहे हैं। इस तरह फसलों की प्रत्येक सिंचाई करने में उन्हें प्रति बीघा 1600 से 2000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। किसानों ने कहा कि क्षेत्र के सभी राजकीय नलकूप पिछले करीब 20 वर्षों से ठप पड़े हैं। बिजली की हालत में सुधार होने के बावजूद सरकार की ओर से हर खेत तक बिजली पहुंचाने की योजना भी पिछले चार-पांच वर्षों से आधी- अधूरी पड़ी है। फसलों के पटवन के लिए उन्हें डीजल अनुदान की राशि भी नहीं मिल रही है। लिहाजा समय पर फसलों की सिंचाई करना इलाके के किसानों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। कई किसानों ने बताया कि एग्रीकल्चर कनेक्शन के नाम पर पिछले कई वर्षों से कुछ जगहों पर खेतों में विद्युत पोल गाड़ कर योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। नतीजतन वे ड्रिप सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर के जरिए भी फसलों के पटवन करने में असमर्थ हो रहे हैं।

किसानों ने कहा कि हर खेत तक विद्युत कनेक्शन व बोरिंग की व्यवस्था रहने पर पटवन की समस्या से काफी हद तक उन्हें निजात मिल सकती थी। किसानों ने बंद पड़े सभी राजकीय नलकूपों को चालू करवाने तथा हर खेत तक बिजली पहुंचाने की योजना को सरजमीं पर लागू करवाने की मांग जिलाधिकारी से की है।

अंतर्वर्ती खेती किसानों के लिए वरदान, अच्छी पैदावार होने की उम्मीद

गढ़पुरा, निज संवाददाता। प्रखंड क्षेत्र के किसान अंतरर्वर्ती खेती कर खुशहाल हो रहे हैं। वर्तमान रबी फसल के अंतर्गत किसान मक्के के साथ आलू, राई के साथ आलू, शरद कालीन गन्ने के साथ मक्का आदि की फसल एक ही खेत में लगाकर अच्छी पैदावार कर रहे हैं। कुम्हारसो के प्रगतिशील किसान राजीव कुमार ने बताया कि पहले किसान खेतों में एक ही फसल लगते थे, लेकिन धीरे-धीरे उसमें बदलाव आया। आधुनिक कृषि अपनाने के साथ ही तकनीकी रूप से खेती शुरू हुई। नतीजा कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। अच्छे बीज व कृषि यंत्र आने से उत्पादन पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। इससे पैदावार अच्छी हो रही है।

बीएओ अशोक पंजियार ने बताया कि एक ही खेत में जब एक साथ एक से अधिक फसलें अलग-अलग कतार में बोई जाती हैं, उसे अंतरवर्ती खेती कहते हैं। उदाहरणार्थ, गन्ने की फसल की दो कतार के बीच यदि सरसों, राई, मसूर, चना या अन्य किसी भी फसल को कतार में बोया जाएगा तो उस खेती को अंतर्वर्ती खेती कहा जाएगा। इससे किसानों की आय दोगुनी होने के आसार बढ़ जाते हैं।

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