
सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का मामला अधर में
कमरे, उपस्कर, ड्रिंकिंग वाटर आदि से संबंधित कार्य पूर्ण होने के बाद 15 अगस्त को विद्यालयों का फोटोग्राफ लिये जाने का था निर्देश
बेगूसराय, हमारे प्रतिनिधि। विभागीय निर्देश के बाद भी सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का मामला अधर में लटक गया है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव की ओर से जुलाई माह में विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया था। एसीएस ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे पर्यवेक्षण में अभियान के तौर पर समस्याओं को दूर करने का कार्य करेंगे। यह भी कहा था कि विद्यालयों में उपलब्ध कमरे, उपस्कर, ड्रिंकिंग वाटर आदि से संबंधित कार्य पूर्ण होने के बाद 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर विद्यालयों का फोटोग्राफ लिया जाएगा। इन फोटोग्राफ को ई शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
बताया जाता है कि इस मद में राशि नहीं मिलने के कारण ज्यादातर स्कूलों में कोई कार्य नहीं हो सका। एसीएस ने पत्र में बताया था कि विभाग की ओर से लगातार प्रयास के बाद भी निरीक्षण में कई कमियां पायी गयी। विद्यालयों में विद्युतीकरण नहीं है। वर्गकक्षों में पर्याप्त संख्या में बल्ब व ट्यूबलाइट तथा पंखा का अभाव है। पेयजल के लिए निर्मित वाटर पोस्ट के सभी नल खराब स्थिति में हैं। शौचालयों में रनिंग वाटर की सुविधा नहीं है। विद्यालयों में बेंच डेस्क के रखरखाव में उदासीनता बरती जा रही है। आईसीटी व सस्मार्ट क्लास से संबंधित उपकरणों का समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है। वर्गकक्षों व गलियारों में टूटे फर्नीचर व अन्य बेकार सामग्रियां रखी जा रही हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक तकनीकी पेंच के कारण स्कूलों में राशि मुहैया नहीं करायी जा सकी। बताया गया कि शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश के तहत स्कूलों में पचास हजार रुपए की दर से राशि भेजी जानी थी। ताकि स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करायी जा सके। लेकिन, दूसरी ओर ट्रेजरी से बिल पास नहीं हो सका। ट्रेजरी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक कार्य संपन्न होने के बाद ही बिल पारित किया जा सकता है। बहरहाल स्कूल में विकास का कार्य प्रभावित हो रहा है। कहते हैं अधिकारी बिल भुगतान में तकनीकी पेंच है। इसके कारण स्कूलों में सुविधा बहाल करने में समस्या आ रही है। उच्चाधिकारी को इससे अवगत कराते हुए मार्गदर्शन मांगा गया है। मनोज कुमार, डीईओ

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