DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   बिहार  ›  बेगूसराय  ›  बेरोजगारों को शिक्षक बनाने का सपना दिखाने वाले ठगों पर होगी प्राथमिकी

बेगुसरायबेरोजगारों को शिक्षक बनाने का सपना दिखाने वाले ठगों पर होगी प्राथमिकी

हिन्दुस्तान टीम,बेगुसरायPublished By: Newswrap
Tue, 13 Apr 2021 07:52 PM
बेरोजगारों को शिक्षक बनाने का सपना दिखाने वाले ठगों पर होगी प्राथमिकी

सूबे में 982 प्रारंभिक स्कूलों को सरकारीकरण के नाम पर मोटी रकम लेकर बेरोजगारों को सरकारी शिक्षक बनाने का सपना दिखाने वाले जिले के ठगों के लिए बुरी खबर है। साथ ही शिक्षक बनने का ख्वाब देखने वाले वैसे बेरोजगारों के लिए नसीहत भी। 12 अप्रैल 2021 को प्राथमिक शिक्षा के निदेशक डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने डीईओ को पत्र देकर स्पष्ट किया है कि सरकार के पास किसी भी गैर सरकारी विद्यालय के अधिग्रहण का मामला विचाराधीन नहीं है।

निदेशक ने कहा है कि विभाग को सूचना मिल रही है कि कुछ-एक तथाकथित संघो व व्यक्तियों के द्वारा निजी विद्यालयों के अधिग्रहण के नाम पर लोगों को गुमराह कर अवैध तरीके से राशि की वसूली की जा रही है। ऐसे मामले का संज्ञान आने पर त्वरित गति से विधि सम्मत कार्रवाई करने का अधिकार डीईओ को दिया गया है।

वेतन भुगतान के लिए आवेदन मिलने लगे तो विभाग आ गये एक्शन मोड पर

निदेशक ने कहा है कि विभिन्न व्यक्तियों व संघ और संगठनों के द्वारा गैर सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों के अधिग्रहण व इसमें कार्यरत शिक्षक व शिक्षकेत्तरकर्मियों के वेतन भुगतान के संबंध में समय-समय पर आवेदन विभाग को प्राप्त हो रहा है। पूर्व में विभागीय अधिसूचना 23 अगस्त 1993, विभागीय आदेश 25 सितंबर 2006 व 28 नवंबर 2019 के आदेश में विद्यालय अधिग्रहण के मामले के अस्वीकृत करते हुए स्पष्ट किया जा चुका है कि सरकार के पास किसी भी गैर सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों के अधिग्रहण का मामला विचाराधीन नहीं है।

निदेशक ने डीईओ को पत्र देकर ऐसे किया स्पष्ट

मंत्रीपरिषद के द्वारा वर्ष 1993 में विद्यालय अधिग्रहण के मामले को 23 अगस्त 1993 के अधिसूचनाआदेश पर अस्वीकृत कर दिया गया है। 25 सितंबर 2006 द्वारा मामले के संबंध में पूर्ण वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए विद्यालय अधिग्रहण के मामले को अस्वीकृत किया गया है। साथ ही यह भी संसूचित किया गया है कि सरकार के द्वारा आवश्यकतानुसार प्राथमिक विद्यालय खोलने व शिक्षक उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है। इसलिए विद्यालय अधिग्रहण का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। सरकार द्वारा शिक्षकों के वेतनादि भुगतान का कोई औचित्य नहीं है। वैसे निजी विद्यालय जो अधिग्रहण सरकारीकरण का दावा करते हैं के संबंध में किसी भी प्रकार की जांच की आवश्यकता नहीं है। गैर सरकारी प्रारंभिक विद्यालय अधिग्रहण के मामले को अस्वीकृत करते हुए आवेदक को सूचना दे दी गयी है।

वर्ष 1990 से गुमराह कर वसूली का गोरखधंधा हुआ शुरू

16 जनवरी 1990 को मंत्री परिषद की बैठक में 390 विद्यालयों के अधिग्रहण की कार्रवाई के लिए डीएम के द्वारा जांच कराने के बाद ही कराने का प्रस्ताव दिया गया। मंत्री से प्राप्त सूची व अन्य मिलाकर 982 स्कूल के राजकीयकरण के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया गया। मंत्री परिषद की 30 जून 1993 की बैठक में विचार के लिए रखा गया। उसमें स्पष्ट किया गया कि शिक्षा के हित मे होगा कि अब किसी विद्यालय का अधिग्रहण नहीं किया जाय। बल्कि जैसे-जैसे नए विद्यालय की आवश्यकता हो वहां सरकार नए विद्यालय खोले व नियमानुसार व आरक्षण के आधार पर शिक्षकों की बहाली की जाय। इसमें 16 जनवरी को 1990 को 982 प्रारंभिक विद्यालयों के अधिग्रहण के निर्णय को निरस्त कर दिया गया।

जिले में हजारों बेरोजगार हो चुके हैं ठगी के शिकार

सरकारी शिक्षक के नाम पर जिले में हजारो बेरोजगार अबतक ठगी के शिकार हो चुके हैं। इस नेटवर्क सदर प्रखंड के चिलमिल व शहर के बाघी मोहल्ला में काफी सक्रिय है। यहां तक कि एक संस्थान के माध्यम से लोगों को फंसाया जाता है। इस नेटवर्क से जुड़े सरगना अबतक करोड़ों की उगाही कर चुके हैं। ठगी के शिकार युवक अपनी किस्मत पर आंसू बहा रहे हैं।

कहते हैं अधिकारी

प्राथमिक शिक्षा के निदेशक का पत्र प्राप्त हुआ है। मामले की जांच की जा रही है। साथ ही बेरोजगारों को शिक्षक की नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वालों की पहचान की जा रही है। कोई पीड़ित बेरोजगार यदि आवेदन देता है उस आधार पर जांच कर संबंधित दलालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी जाएगी।

रजनी कांत प्रवीण, जिला शिक्षा अधिकारी

संबंधित खबरें