गेहूं की खेती में 21 हजार खर्चे पर महज दो हजार का मुनाफा

Newswrap हिन्दुस्तान, बेगुसराय
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लीड पेज 4::::::::::क्ष्य काफी कम, किसानों को नहीं मिल रहा है एमएसपी का लाभ बिचौलियों के हाथों औने-पौने भाव में गेहूं बेचने को विवश हो रहे हैं किसान फोटो नं.07,बछवाड़ा प्रखंड की रानी- एक पंचायत में...

गेहूं की खेती में 21 हजार खर्चे पर महज दो हजार का मुनाफा

इंटो::::::::गेहूं की खेती में पिछले साल प्रति एकड़ करीब 18 हजार रुपए खर्च हुए थे। पिछले साल प्रति एकड़ खेत में करीब 11 क्विंटल गेहूं का उत्पादन हुआ था। प्रति एकड़ फसल करीब 27 हजार रुपये में बेची गई थी। इस तरह पिछले साल गेहूं की खेती में किसानों को कुल 9000 का मुनाफा हुआ था। इस साल गेहूं की खेती में लागत बढ़कर प्रति एकड़ 21 हजार पर पहुंच गया। फसल कटनी के करीब 15 दिनों पूर्व बेमौसम आंधी- पानी व ओलावृष्टि से फसल को व्यापक नुकसान भी हुई और पिछले साल की तुलना में इस साल उत्पादन में करीब 20 से 25 फ़ीसदी कमी आई है।

खाद, बीज, जोत, सिंचाई, मजदूरी, अनाज की ढुलाई आदि मदों में महंगाई बढ़ने के साथ ही इस साल प्रति एकड़ गेहूं की खेती करने में करीब 21 हजार रुपए खर्च करने पड़े हैं। जो पिछले साल की तुलना में तीन हजार रुपये अधिक है। इस साल प्रति एकड़ गेहूं की फसल बेचने पर किसानों को महज 23 हजार रुपए ही प्राप्त हो रहे हैं। लिहाजा इस साल गेहूं की खेती में प्रति एकड़ मुनाफा करीब दो हजार रुपये पर सिमट रहा है। उदय कुमार राय बछवाड़ा। जिले में गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहां की मिट्टी और सभी भौगोलिक दशाएं गेहूं उत्पादन के लिए काफी अनुकूल हैं। गेहूं की खेती में लागत पूंजी के अनुरूप किसानों को मुनाफा नहीं मिल रहा है। हर साल कृषि लागत पूंजी बढ़ रही है और मुनाफा घटता जा रहा है। खेतों से फसल तैयार होने के समय किसानों को उनके पैदावार का उचित मूल्य नहीं मिलता। सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की व्यवस्था भी पूरी तरह लचर साबित हो रही है। सरकारी दर पर गेहूं खरीद की समुचित व्यवस्था के अभाव में किसानों को अपना गेहूं बिचौलियों के हाथों औने- पौने भाव में बेचना पड़ रहा है। लिहाजा किसानों की कड़ी मेहनत व पूंजी का मुनाफा बिचौलिए उठा रहे हैं। ऊपर से हर साल किसानों को मौसम की मार भी सहनी पड़ रही है। हालात यह है कि गेहूं की खेती करने में किसानों को जितना खर्च करना पड़ रहा है, अनाज बेचकर उतनी भी रकम जुटाना मुश्किल सा है। यह पीड़ा आपका अपना अखबार हिन्दुस्तान की ओर से चलाए जा रहे धरती पुत्रों की व्यथा अभियान के तहत गेहूं उत्पादक किसानों ने रविवार को बयां की। रानी- एक पंचायत के राम उदित राय, राजीव राय, रामदेव ठाकुर, मनोज राय, रविंद्र राय, संतोष कुमार, विजय राय, अनुरंजन राय आदि गेहूं उत्पादक किसानों ने कहा कि गेहूं की खेती करने में विगत साल की तुलना में इस साल प्रति एकड़ करीब 3000 रुपये अधिक खर्च करने पड़े हैं। पिछले साल प्रति एकड़ गेहूं की खेती करने में करीब 18 हजार रुपए खर्च करने पड़े थे। इस साल गेहूं की खेती करने में कम से कम प्रति एकड़ 21 हजार 500 रुपये खर्च करने पड़े हैं। पिछले साल गेहूं का पैदावार करीब 11 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से हुआ था। इस साल फसल की कटाई से करीब 15 दिनों पूर्व अचानक आई आंधी- पानी व ओलावृष्टि से फसल की व्यापक क्षति हुई। गेहूं का पैदावार विगत साल की तुलना में इस साल करीब 20 से 25 फ़ीसदी कम हुआ है। इस साल गेहूं का उत्पादन करीब 9 क्विंटल प्रति एकड़ पर सिमट कर रह गया है। जो पिछले साल की तुलना में प्रति एकड़ 2 क्विंटल कम है। किसानों ने कहा कि पिछले साल गेहूं की खेती में प्रति एकड़ करीब 18000 रुपए खर्च हुए थे। प्रति एकड़ फसल करीब 27 हजार रुपए में बेची गई थी। इस तरह गेहूं की खेती में किसानों को कुल 9000 का मुनाफा हुआ था। इस साल गेहूं की खेती में लागत बढ़कर प्रति एकड़ 21000 पर पहुंच गया। इस साल फसल कटनी के समय बेमौसम आंधी- पानी से फसल को काफी क्षति पहुंची और पिछले साल की तुलना में इस साल उत्पादन घट गया। इधर, खाद, बीज, जोत, सिंचाई, मजदूरी, अनाज की ढुलाई आदि मदों में महंगाई बढ़ने के साथ ही इस साल प्रति एकड़ गेहूं की खेती करने में करीब 21 हजार रुपए खर्च करने पड़े हैं। जो पिछले साल की तुलना में 3 हजार रुपये अधिक हैं। इस साल प्रति एकड़ खेत में उत्पादित गेहूं बेचने पर किसानों को महज 2300 रुपये ही प्राप्त हो रहे हैं। लिहाजा इस साल गेहूं की खेती में प्रति एकड़ मुनाफा करीब 2000 रुपये पर सिमट रहा है। भूस्वामियों से ठेका पर जमीन लेकर गेहूं की खेती करने वाले किसानों को अपने घर से घाटा उठाना पड़ रहा है। इस साल एमएसपी से 300 रुपये कम कीमत पर किसानों को बेचना पड़ रहा है गेहूं इस साल जिले के पैक्सों में गेहूं खरीदारी का लक्ष्य काफी कम निर्धारित किया गया है। विभागीय रिकार्ड के अनुसार जिले में करीब पौने तीन लाख मैट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ है। वहीं खरीदारी का लक्ष्य सिर्फ 426 एमटी निर्धारित किया गया है। किसानों ने कहा कि सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। सरकारी तौर पर गेहूं खरीद के कम लक्ष्य निर्धारण के कारण किसान अपना गेहूं बिचौलियों के यहां 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचने को विवश हो रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि पिछले साल गेहूं खरीदारी के लक्ष्य का उचित निर्धारण किए जाने के कारण किसानों का गेहूं सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब 200 रुपये अधिक कीमत पर बिका था। पिछले साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था जबकि किसानों से व्यापारियों ने 2600 से 2700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद की थी। पैक्सों में खरीदारी की व्यवस्था ठप रहने पर बिचौलियों के शरण में जाते हैं किसान : किसानों ने बताया कि सरकारी दर पर गेहूं क्रय केंद्र के रूप में चिन्हित अधिकतर पैक्सों पर अनाज की खरीद निर्धारित समय पर शुरू नहीं की जाती है। क्रय केंद्रों पर लगातार खरीदारी ठप रखे जाने के कारण किसानों को बैरंग लौटना पड़ता है। इधर, गेहूं कटनी के बाद किसानों के समक्ष खाद- बीज दुकानदारों व राशन दुकानदारों के बकाए कर्ज चुकता करने की परेशानी रहती है। लिहाजा पैसे की व्यवस्था के लिए किसान अपना गेहूं बेचने किसी आढ़ती या बिचौलियों के शरण में जाने को विवश हो जाते हैं। किसानों ने कहा कि बछवाड़ा प्रखंड के 18 पैक्सों में से इस साल महज एक पैक्स दादुपुर को गेहूं क्रय केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है। इस एकमात्र क्रय केंद्र पर गेहूं अधिप्राप्ति का महज 400 क्विंटल ही लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यहां एक तो गेहूं अधिप्राप्ति के लक्ष्य काफी कम निर्धारित किए गए हैं, वहीं अब तक गेहूं खरीद का खाता भी नहीं खुल सका है। जिले में पैक्सों के माध्यम से गेहूं खरीदारी की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस साल जिले के लिए फिलहाल गेहूं अधिप्राप्ति का लक्ष्य 426 एमटी निर्धारित किया गया है। अभी जिले को प्राप्त लक्ष्य के हिसाब से ही क्रय केंद्र के रूप में चिन्हित पैक्सों को खरीदारी का लक्ष्य दिया गया है। आगे जिले में गेहूं खरीदारी का लक्ष्य बढ़ने पर संबंधित सभी क्रय केंद्रों के लिए गेहूं अधिप्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा। इस साल सरकार की ओर से गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। भुवनेश्वर झा, जिला सहकारिता अधिकारी बेगूसराय एक नजर खर्च पर प्रति एकड़ खर्च 2025 2026 जोत 4900 5300 खाद 2900 3300 बीज 3500 4000 सिंचाई 1500 2000 मजदूरी 3200 4000 दवा 800 1100 अनाज ढुलाई 1200 1800 कुल 18000 21500

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