गढ़पुरा में पिछात गेहूं की ऊपज में गिरावट

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पेज 4:::::::खेत की जुताई से लेकर कटाई-दौनी तक प्रति कट्ठा आठ से नौ सौ रुपये तक हुआ खर्च

गढ़पुरा में पिछात गेहूं की ऊपज में गिरावट

गढ़पुरा, एक संवाददाता। प्रखंड क्षेत्र में गेहूं की कटनी शुरू हो गई है। लेकिन, उम्मीद से कम उत्पादन होने के कारण किसान मायूस हैं। किसानों के अनुसार प्रति कट्ठा 60 से 80 किलो तक गेहूं उत्पादन की उम्मीद थी। इस बार औसतन 40 से 50 किलो ही उपज हो रही है। गेहूं के दानों में चमक भी कम है। जिससे बाजार में कम कीमत मिलने की आशंका है। गढ़पुरा गांव के किसान राम प्रकाश यादव ने बताया कि पिछले वर्ष प्रति कट्ठा करीब 80 किलो तक उत्पादन हुआ था, लेकिन इस वर्ष बमुश्किल 50 किलो के आसपास उपज मिल रही है।

किसानों के अनुसार 15 नवंबर को बुआई करने के कारण उनकी फसल की उपज करीब 60 किलो प्रति कट्ठा तक हो रही है। जबकि दिसंबर में बुआई करने वाले किसानों की ऊपज 40 से 50 किलो के बीच रह गई है। किसान माहेश्वर यादव और घुरण महतो ने बताया कि खेत की जुताई से लेकर कटाई-दौनी तक प्रति कट्ठा आठ से नौ सौ रुपये तक खर्च हुआ है जबकि उत्पादन 40 से 50 किलो प्रति कट्ठा ही मिल रहा है। ऐसे में खर्च और बाजार मूल्य की तुलना करने पर किसान घाटे में दिख रहे हैं। हथिया नक्षत्र की बारिश से बढ़ी परेशानी किसानों का कहना है कि इस वर्ष हथिया नक्षत्र में हुई भारी बारिश से मध्यम और निचले खेतों में लंबे समय तक जलजमाव रहा। जलजमाव खत्म होने में दिसंबर तक का समय लग गया। इससे गेहूं की बुआई में देरी हुई। करीब 30 प्रतिशत किसानों ने 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच बुआई की। 15 दिसंबर के बाद बुआई ने रफ्तार पकड़ी। करीब 10 प्रतिशत खेतों में अधिक गीलापन रहने के कारण किसान गेहूं की खेती ही नहीं कर सके। किसान शंभू सिंह, श्याम सुन्दर दास आदि ने बताया कि फरवरी के अंतिम सप्ताह से तापमान बढ़ने लगा। इससे देर से बोए गए गेहूं के पौधों में दाने छोटे रह गए और वजन कम हो गया। प्रखंड क्षेत्र में इस वर्ष काफी मात्रा में गेहूं की खेती की गई थी । आंधी-बारिश से फसल को नुकसान किसानों के अनुसार शुरुआत में फसल अच्छी थी। लेकिन 23 से 25 मार्च के बीच आई आंधी और हल्की बारिश से फसल को नुकसान हुआ। कई जगह पौधे गिर गए। किसान अनील झा ने बताया कि कटनी के दौरान पौधों के साथ मिट्टी भी आ रही है। किसान सुनील झा ने बताया कि मौसम विभाग की ओर से फिर से आंधी-बारिश की संभावना जताई जा रही है।जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कहते हैं अधिकारी नवंबर में जिन किसानों ने गेहूं की बुआई कर ली थी उनका उत्पादन अपेक्षाकृत बेहतर है। दिसंबर में बुआई करने वालों का उत्पादन कम हो सकता है। अभी प्रखंड में फसल क्षतिपूर्ति की आकलन किया जा रहा है। ओम प्रकाश यादव,बीएओ, गढ़पुरा रिपोर्टर:अग्निवेश वत्स

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