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7 अगस्त, 2020|1:35|IST

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परिवार संग अदा की गई ईद-उल-अज़हा की नमाज़, कोरोना से मुक्ति के लिए की गई दुआ

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वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के कारण चल रहे डॉकलाउन के बीच आपसी भाईचारे व सामाजिक सौहार्द के माहौल में एखलास व एहतराम के साथ इस क्षेत्र में शनिवार को ईद-उल-अज़हा का त्योहार मनाया गया। इस दौरान मुसलमान भाईयों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए खोशू व खोजू के साथ नूरानी माहौल में अपने परिवार के संग ईद-उल-अज़हा की नमाज अदा करते हुए खुदा का शुक्र अदा किया। नमाज़ के बाद कोरोना से मुक्ति के लिए विशेष रूप से दुआ की गई। बकरीद के मौके पर इस क्षेत्र की सभी मस्जिदें व ईदगाह सूनी पड़ी रही। कोरोना को हराने के संकल्प को लेकर लोगों ने बकरीद के मौके पर प्रचलित सदियों पुरानी नमाज़ के बाद एक दूसरे के गले मिलकर बधाई देने की परंपरा को छोड़कर सोशल डिस्टेंसिंग के दौरान एक-दूसरे का हाल पूछकर सलामती की दुआ दी। ईद-उल-अज़हा की नमाज़ पूरे खोशू व खोजू के साथ क्षेत्र के नुरूल्लाहपुर, सागी, बाड़ा, तेतराही, मालपुर, सिरसी, बरियारपुर पश्चिमी, फफौत, मिर्जापुर, खोदावंदपुर सहित सभी गांव के लोगों ने अपने परिवार के साथ अपने-अपने घर में अदा की। क्षेत्र की ईदगाह व मस्जिदों मेंं सरकारी दिशा-निर्देश के तहत पूर्व से तय चार से पांच मस्जिद के जिम्मेदार लोगों ने ईद की नमाज़ अदा की। नमाज़ के बाद लोगों ने वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण से निजात पाने के साथ खैर व आफियत,अपने गुनाहों से माफी,जहन्नम से बचाव तथा आपसी भाईचारे व सामाजिक सौहार्द तथा विश्व शांति के लिए सामूहिक दुआ की। उसके बाद लोगों ने बकरे की कुर्बानी देकर सुन्नत-ए-इब्राहीमी की इत्तबा की।

बकरीद पर्व को लेकर प्रशासन मुस्तैद

खोदावंदपुर। निज प्रतिनिधि

बकरीद पर्व को लेकर थाना क्षेत्र में अमन व अमान बनाए रखने के उद्देश्य से शनिवार को प्रशासन काफी मुस्तैद दिखा। प्रभारी बीडीओ सह सीओ सुबोध कुमार, थानाध्यक्ष दिनेश कुमार सहित सभी अधिकारी पुलिस बल के साथ थाना क्षेत्र के विभिन्न गांव तथा चौक-चौराहे पर सोशल डिस्टेंसिंग व सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करते हुए देखे गए। थानाध्यक्ष दिनेश कुमार ने बताया कि विधि व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सभी गांव मेंं सघन गश्ती अभियान चलाया गया।

कोरोना संकट के बीच मनाया गया बकरीद, सादगी के साथ अदा हुई नमाज

गढ़पुरा। कोविड-19 महामारी के बीच सरकार द्वारा निर्धारित स्वास्थ्य के सख्त दिशा निर्देश पर अमल करते हुए मुस्लिम समुदाय ने बकरीद का जश्न साधारण तरीके से मनाया। प्रखंड के तमाम मस्जिदों में अपने निर्धारित समय पर नमाज अदा की गई, लेकिन लोगों की संख्या नगण्य थी। जो भी लोग मस्जिद में नमाज अदा कर रहे थे उनमें इमाम और मुअज्जीम के अलावा इने गिने लोग थे। नमाज को लेकर मस्जिद प्रवेश करने से पूर्व सभी की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। इसके अलावा सभी लोग मास्क लगाए हुए थे। मस्जिद में सैनिटाइजर की भी व्यवस्था थी। सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए लोगों ने नमाज पढ़ी। प्रखंड के मालीपुर स्थित जामा मस्जिद के अलावा कोरैय भंगहा, सुजानपुर, बरमोतरा, राहुल नगर, धर्मपुर, गढ़पुरा, कुम्हारसों, प्राणपुर, रजौड़,सोनमा,इमादपुर, खखरुआ, मौजी हरिसिंह स्थित मस्जिदों में भी विशेष नमाज अदा की गई। इस दौरान लोगों ने गले मिलने से परहेज किया। बोलकर ही एक दूसरे को मुबारकबाद दी। लोगों ने इस अवसर पर कुर्बानियां भी दी।(निसं)

ईद-उल-जुहा की नमाज व कुर्बानी के साथ बकरीद का पर्व शांति पूर्वक सम्पन्न।

छौड़ाही। निज संवाददाता

मुस्लिम समुदाय के ईद-उल-जुहा(बकरीद)का त्योहार शनिवार को ईद-उल-जुहा की नमाज व कुर्बानी के साथ शांति पूर्वक सम्पन्न हो गया। इस क्रम शनिवार को प्रखंड क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय के मुहल्ले मे लोगो ने नित्यकर्म से निवृत्त हो,स्नान कर नये नये कपड़े पहन कर तैयार हो,मुहल्ले के बड़े दरवाजा, मदरसा के हाल,व अन्य छोटे बड़े जगहो पर नमाज अदा की।नमाज के बाद हाथ उठा व सलाम कर एक दूसरे को ईद-उल-जुहा की शुभकामना दी।कोरोना डर का आलम यह था कि लोग डर से गले तक नही मिले।नमाज अदा के बाद लोग अलग अलग जगहो पर बकरीदको लेकर बकरे की कुर्बानी दी। इस अवसर पर क्षेत्र के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र परोड़ा , एकंबा, ऐजनी, पनसला,डुमरी, सांवत,बखड्डा,अमारी,शाहपुर सिहमा समेत दर्जनो गांव के मुहल्ले मे नमाजियो की भीड़ देखी गई। इस क्रम बीडीओ,सीओ, व ओपी अध्यक्ष ओमप्रकाश कुमार पुलिस बल के साथ शांति व्यवस्था को लेकर भ्रमण करते देखे गए।

डंडारी में सादगी के साथ अदा की गई नमाज

डंडारी। प्रखंड क्षेत्र में मुस्लिम भाइयों के द्वारा शनिवार को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का पर्व सादगी और आपसी भाईचारा के बीच मनाया गया। कोविड- 19 वैश्विक महामारी के बीच सरकार द्वारा निर्धारित स्वास्थ्य के सख्त दिशा - निर्देशों का पालन करते हुए बकरीद की नमाज अदा की गई। तेतरी, डंडारी, कटहरी, बांक, पीरनगर आदि गांवों में मुस्लिम भाइयों ने देश और दुनिया से कोरोना महामारी को जल्द समाप्त करने के लिए अल्लाह से दुआएं मांगी। साथ ही घरों में ही बकरे की कुर्बानी दी। मान्यताओं के अनुसार पैगंबर हजरत इब्राहिम से ही कुर्बानी देने की प्रथा शुरू हुई थी। कहा जाता है कि अल्लाह ने एक बार पैगंबर इब्राहिम से कहा था कि वह अपने प्यार और विश्वास को साबित करने के लिए सबसे प्यारी चीज का त्याग करें। तब पैगंबर इब्राहिम ने अपने इकलौते बेटे को कुर्बानी देने का फैसला किया था। कहते हैं कि जब पैगंबर इब्राहिम अपने बेटे को कुर्बानी देने वाले थे। उसी वक्त अल्लाह ने अपने दूत को भेजकर उनके बेटे को एक बकरे से बदल दिया था। तभी से पैगंबर इब्राहिम के विश्वास को याद करने के लिए बकरीद मनाई जाती है। जो त्याग और बलिदान का पैगाम देती है।

बकरीद सामाजिक एकता और भाईचारे की देती है शिक्षा : विधायक

बकरीद पर अकीदतमंद गरीब निसहायों के बीच किया गया धोती साड़ी का वितरण

गढ़पुरा। निज संवाददाता

कुर्बानी का मकसद ये कतई नहीं है कि अल्लाह को खून या गोश्त पसंद है या उसे इसकी जरूरत है। बल्कि इसका मकसद ये है कि हर इंसान अपने जान-माल को अपने रब की अमानत समझे और उसकी खुशी के लिए किसी भी बलिदान के लिए तैयार रहे। बकरीद में कुर्बानी तो जानवर की होती है, लेकिन इससे जो हमें सीख मिलता है उसे समझने की जरुरत है। शनिवार को अपने कुम्हारसों गांव स्थित पैतृक निवास स्थान पर बकरीद के अवसर पर गरीब और निस्सहाय अकीदतमदों के बीच धोती-साड़ी वितरण के दौरान विधायक उपेंद्र पासवान ने यह बातें कही। उन्होंने आगे कहा कि इस पर्व का एक संदेश यह भी है कि हमें अपने चरित्र को पाक-साफ रखना चाहिए। दिल को साफ रखें और दुनिया में एक बेहतरीन जगह बनाएं। किसी भी पर्व के पीछे उसका इतिहास होता है, उससे जुड़ी मान्यताएं होती हैं और सामाजिक सरोकार होते हैं। कुर्बानी का पर्व बकरीद का मकसद भी सामाजिक एकता, आपसी भाईचारा, एक-दूसरे की जरूरत और किसी भी कठिनाई के समय अपना सब कुछ कुर्बान करने की भावना को बनाए रखना है। इस अवसर पर एक सौ पुरुष और महिला के बीच धोती- साड़ी वितरित की गई। मौके पर प्रखंड राजद अध्यक्ष रामरूप महतो, मोहम्मद फिरोज, प्रशांत सिंह, ऋषि कुमार, रामसेवक राय आदि थे।

मुस्लिमों ने ईद-उल-अजहा का नमाज घरों में पढ़कर कुर्बानी का फर्ज अदा किया

तेघड़ा। निज संवाददाता

मुस्लिमों ने शनिवार को ईद - उल-अजहा अर्थात बकरीद का नमाज अपने अपने घरों में पढ़कर कुर्बानी का फर्ज अदा किया। मुस्लिम समुदाय के बड़े बुजुर्गो ने कहा कि इस वर्ष ईद के बाद बकरीद का नमाज भी घरो में अदा होने से इसका जश्न फीका हो गया। बच्चों ने भी कहा कि बकरीद पर्व का मजा किरकिरा हो गया। कोरोना लॉकडाउन एवं सावन महीना होने से हिन्दू परिवार के मित्रों को बकरीद पर्व पर आमंत्रित नहीं किया गया। मक्की मस्जिद के ईमाम मो फैयाद अहमद कासमी ने कहा कि रब की राह में अपने सबसे अधिक मूल्यवान वस्तु की कुर्बानी देना हीं बकरीद है। मुस्लिमों ने स्नान करने के बाद घरों में नमाज पढ़कर बकरा की कुर्बानी दिया। मस्जिदों में सन्नाटा पसरा रहा। शांति एवं व्यवस्था के लिए मुस्लिम बहुल ईलाका में पुलिस बल गश्त लगाती रही। समाचार प्रेषण तक सर्वत्र शांति की सूचना थी।तेघड़ा नगर पंचायत की मुख्य पार्षद आँसमा खातून, मक्की मस्जिद के सचिव मो अनजारूल अमीन उर्फ बच्चू एवं पार्षद मो, मेहबूब आलम एवं तेघड़ा कब्रिस्तान के सचिव मो गाजी सलाहउद्दीन आदि ने लोगों को बकरीद पर्व की मुबारकबाद दिया है।

बलिया में सादगी के साथ मनाया गया बकरीद का पर्व

बलिया। कोरोना महामारी का असर बकरीद पर्व पर भी देखा गया। इस अवसर पर अधिकांश मुस्लिम भाइयों ने मस्जिदों के बजाय अपने घरों में ही नमाज अदा की। साथ ही अपने लोगों के सलामती की दुआ की गई। नमाज अदा करने के बाद बकरे की बलि भी दी गई। इसके बाद एक दूसरे से गले मिलकर भाईचारा एवं शांति का संदेश देने का काम किया गया। मुस्लिम भाइयों ने बताया कि बकरीद का यह पर्व लोगों को सच्चाइयों पर चलकर सबकुछ कुर्बान कर देने का संदेश देता है। तो दूसरी ओर इस पर्व को लेकर बच्चों के बीच खुशी तो देखी गई। लेकिन कोरोना ने इन बच्चों की खुशी पर भी पानी फेर दिया। बाजारों में भी इस अवसर पर कोई खास चहल पहल नहीं देखा गया।

मनिअप्पा में बकरीद पर्व पर हुआ जलसा

मटिहानी। मनिअप्पा पंचायत भवन में बकरीद पर्व पर जलसा का आयोजन किया गया। इसमें पूर्व पंचायत समिति सदस्य मो अमजद का विशेष योगदान था। मौजूद लोगों सेवई दूध खाकर एक दूसरे को बकरीद पर्व की बधाई दी। मौके पर मुखिया संजीव कुमार, कौशल कुँवर, फोन बाबू, राजा कुँवर, मोलू कुँवर, मन्टुन कुँवर, अर्जुन, रूपचंद, राजेन्द्र दास आदि थे।

घरों में अता की नमाज

बीहट। लॉकडाउन के कारण मस्जिदों के बंद रहने के वजह से मुस्लिम भाइयों ने शनिवार को ईद उल अजहा(बकरीद) की नमाज अता की। मो. असजद अजी, मो. ओबेश, मो. सलीम आदि ने बताया कि मस्जिद बंद रहने के कारण उनलोगों ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ घर ें ही नमाज अता की। (नि.सं.)

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  • Web Title:Eid-ul-Azha Prayer with Family Prayer for Emancipation of Corona