अमन की दुआ के साथ ईद-उल-अज़हा की नमाज अदा

हिन्दुस्तान, बेगुसराय
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लीड... नमाज को लेकर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात सुरक्षाकर्मी। फोटो नं.04,खोदावंदपुर प्रखंड के नुरूल्लाहपुर में ईद-उल-

अमन की दुआ के साथ ईद-उल-अज़हा की नमाज अदा

खोदावन्दपुर, निज प्रतिनिधि। आपसी भाईचारे व सामाजिक सौहार्द के माहौल में एखलास व एहतराम के साथ इस क्षेत्र में ईद-उल-अज़हा (बकरीद) का त्योहार गुरुवार को मनाया गया। इस अवसर पर मुसलमान भाईयों ने खोशू व खोजू के साथ नूरानी माहौल में ईद-उल-अज़हा की दो रिकअत विशेष नमाज अदा करते हुए खुदा का शुक्र अदा किया। इस अवसर पर बच्चे से बूढ़े तक नये कपड़े व रंगबिरंगी टोपियों में सजे हुए अपने गांव की ईदगाह व मस्जिदों में नमाज़ के बाद एक दूसरे के गले मिलकर ईद की बधाई दी।

बकरीद की नमाज और इमाम की तकरीर

नुरूल्लाहपुर गांव की जामा मस्जिद में बकरीद की नमाज के बाद इमाम व खतीब हाफिज मोहम्मद मुजम्मिल साहब ने कहा कि इस्लाम हमें मिल्लत व मुहब्बत का पैगाम देता है। इस्लाम धर्म के बताए हुए तरीक़े को अपना कर दूसरे धर्म के लोगों की इज्ज़त करते हुए शांति व भाईचारे के साथ अपनी जिंदगी गुजारें। उन्होंने कहा कि आज के दिन अल्लाह के नजदीक सबसे ज्यादा पसंदीदा इबादत कुर्बानी है। कुर्बानी के जानवर के हर एक बाल के बदले एक नेकी अता करने का वादा अल्लाह ने किया है। इस लिए सभी मालदार मुसलमान कुर्बानी के जरिए खुदा की रजा पाने की कोशिश करें। इमाम साहब के नेतृत्व में लोगों ने विश्व शांति, आपसी भाईचारे व सामाजिक सौहार्द के लिए सामूहिक दुआएं की।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका

ईद-उल-अज़हा की नमाज पूरे खोशू व खोजू के साथ क्षेत्र के नुरूल्लाहपुर, सागी, बाड़ा, तेतराही, मालपुर, सिरसी, बरियारपुर पश्चिमी, फफौत, खोदावंदपुर सहित सभी गांव की ईदगाह व मस्जिदों में अदा की गई। इस अवसर पर सभी गांव में नमाजियों की काफी भीड़ देखी गई। कई गांव की ईदगाह व मस्जिदें नमाजियों की भीड़ के सामने छोटी पड़ गई। नमाज के बाद सामूहिक रूप से खैर व आफियत, अपने गुनाहों से माफी, जहन्नुम से बचाव तथा आपसी भाईचारे व सामाजिक सौहार्द के लिए दुआ की गई। नमाज के बाद जीसलाहियत लोग अपने घर को लौट कर कुर्बानी के जरिए हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के सुन्नत की इत्तबा की। यह पर्व गुरुवार से लगातार तीन दिन तक चलेगा। इन तीन दिनों में मुसलमान भाई खुदा की रजा पाने के लिए कुर्बानी करेंगे।

प्रशासन मुस्तैद

बकरीद पर्व को लेकर प्रशासन मुस्तैद बकरीद पर्व को लेकर थाना क्षेत्र में अमन व अमान बनाए रखने के उद्देश्य से गुरुवार को प्रशासन काफी मुस्तैद दिखा। बीडीओ मिथिलेश बिहारी वर्मा, थानाध्यक्ष सहित सभी अधिकारी पुलिस बल के साथ थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों में सघन गश्ती कर सुरक्षा व विधि-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करते हुए देखे गए। बीडीओ ने बताया कि विधि व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सभी गांव में पुलिस बल के साथ गश्ती कराई गई। शरारती तत्वों पर नकेल कसने के लिए पुलिस संपूर्ण थाना क्षेत्र के चप्पे-चप्पे का चक्कर लगा रही है।

कुर्बानी का महत्व

प्रत्येक मालदार मुसलमान पर वाजिब है, कुर्बानी खोदावन्दपुर, निज प्रतिनिधि। बकरीद खुदा के प्रति बंदे की आस्था व विश्वास का त्योहार है। खुदा की खुश्नुदी के लिए यह एक इबादत के साथ-साथ अपने नफ्स को कुर्बान करने की सीख देता है। दुनिया का मोह खुदा की इबादत में बाधक तो नहीं, इस बात की परीक्षा के लिए खुदा ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को सपने में आदेश दिया कि शिशु पुत्र व पत्नी को मरूभूमि में छोड़ आवें। खुदा के हुक्म का पालन करते हुए उन्होंने ऐसा ही किया। मरूभूमि में बच्चे के प्यास की तड़प को देख कर खुदा की करम से उस स्थान पर मीठे पानी का चश्मा (भूगर्भीय जलस्रोत) निकल गया। वही चश्मा (जलस्रोत) आज आब-ए-ज़मज़म के नाम से जाना जाता है। यह बात नुरूल्लाहपुर के इमाम हाफिज मोहम्मद मुजम्मिल साहब ने ईद-उल-अजहा की नमाज से पूर्व अपनी नूरानी तकरीर के दौरान कही। उनहोंने कहा कि जब हज़रत इस्माइल बड़े हुए तो अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को सपने में हुक्म दिया कि अपने सबसे ज्यादा प्रिय वस्तु को कुर्बान कर दें। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने पुत्र इस्माइल को ले जाकर कुर्बानी देने के उद्देश्य से गर्दन पर छुरी चला दी। लेकिन खुदा को तो महज हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के बंदगी की परीक्षा लेनी थी, इसलिए खुदा के हुक्म से हज़रत इस्माइल के स्थान पर जानवर की कुर्बानी हो गई। उसी याद में बकरीद का त्योहार मनाया जाता है। कुर्बानी प्रत्येक मालदार मुसलमान पर वाजिब है। बकरीद के पहले दिन नमाज के बाद घरों को लौट जिन पर कुर्बानी वाजिब है, वह अदा करें। कुर्बानी के गोश्त को तीन बराबर भाग में बांट कर, एक भाग परिवार के सदस्यों के लिए, दूसरा सगे संबंधी तथा मित्रों के लिए एवं तीसरा भाग गरीबों के बीच वितरण किये जाने का नियम है। ऐसा नहीें करने वालों की कुर्बानी अल्लाह के हुक्म के मुताबिक नहीं होती। जो लोग पहले दिन कुर्बानी नहीं दे पाते हैं, उन्हें अपनी सहूलियत के अनुसार बकरीद के दूसरे व तीसरे दिन के असर के वक्त तक कुर्बानी करना चाहिए।

त्याग, बलिदान और इंसानियत का पर्व

भाईचारे और अमन के पैगाम के साथ मनायी गयी ईद उल अजहा नावकोठी, निज संवाददाता। त्याग, बलिदान और इंसानियत का पर्व ईद उल अजहा रविवार को प्रखंड क्षेत्र में हर्षोल्लास, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। प्रखंड के कुल 16 स्थानों पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सामूहिक रूप से ईद उल अजहा की नमाज अदा की। नावकोठी, विष्णुपुर, सैदपुर, देवपुरा, रजाकपुर, हसनपुर बागर, पहसारा, समसा सहित विभिन्न मस्जिदों एवं ईदगाहों में सुबह से ही नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ईद की नमाज को लेकर सुबह से ही मुस्लिम समुदाय में उत्साह का माहौल दिखा। नए और रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चे, युवा और बुजुर्ग सिर पर टोपी पहनकर नमाज में शामिल हुए। नमाज के दौरान लोगों ने पूरे ईमान और अकीदत के साथ अल्लाह से मुल्क की तरक्की, अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी तथा आपसी सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।

प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था

ईद उल अजहा को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क दिखा। पर्व को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी। बीडीओ राहुल रंजन, थानाध्यक्ष मो. फिरदौस, पुलिस इंस्पेक्टर रामकुमार सिंह, सीओ सूरज कुमार, सब इंस्पेक्टर विश्वजीत कुमार, रंजीत कुमार, मिथिलेश कुमार, राकेश Kumar समेत प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी एवं पुलिस बल सुबह छह बजे से ही विभिन्न मुस्लिम बहुल गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त करते रहे। अधिकारियों ने क्षेत्र का भ्रमण कर शांति एवं विधि व्यवस्था का जायजा लिया। नमाज के उपरांत लोगों ने अपने-अपने घरों में परंपरा के अनुसार बकरे की कुर्बानी की रस्म अदा की। पूरे दिन क्षेत्र में धार्मिक उल्लास, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का वातावरण बना रहा। मौके पर मुखिया राष्ट्रपति कुमार, दिनेश यादव, अभिषेक कुमार पिंटु, अजय सहनी, विजय पासवान, मुखिया प्रतिनिधि टुनटुन पोद्दार, रंजीत कुमार पमपम, मुकेश कुमार, निभा देवी, रामनाथ सिंह, सुरेन्द्र पासवान, उप प्रमुख नंदकिशोर पासवान, जिप प्रतिनिधि डॉ. राजेंद्र शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग मौजूद थे।

शांति और भाईचारे की दुआ

बकरीद पर मुसलमानों ने मांगी देश दुनिया में शांति और भाईचारे की दुआएं तेघड़ा,निज प्रतिनिधि। नगर परिषद तेघड़ा और आस-पास में त्याग, बलिदान और समर्पण का त्योहार ईद-उल-अजहा शांतिपूर्ण, अकीदत और आपसी सौहार्द के माहौल में मनाया गया। इस पावन अवसर पर सुबह से ही मुस्लिम समुदाय के लोगों में खासा उत्साह देखा गया। नए वस्त्र पहनकर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने मुख्य ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज पढ़े और देश दुनिया में शांति स्थापित करने की दुआएं मांगी। तेघड़ा, बरौनी और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में मुख्य नमाज का आयोजन किया गया। यहां हजारों की संख्या में अकीदतमंदों ने अल्लाह की बारगाह में सिर झुकाया। बड़ी मस्जिद, मक्की मस्जिद, आधारपुर, हसनपुर, पिढौली बाजितपुर मस्जिद के साथ बरौनी पुरानी ईदगाह पर बड़ी संख्या में लोग जुटे और निर्धारित समय पर ईद-उल-अजहा की नमाज मुकम्मल की गई।

सामूहिक नमाज और ईद की मुबारकबाद

पुरानी ईदगाह में नमाज की कमान जामा मस्जिद के मुख्य इमाम कयामुद्दीन कासमी साहब ने संभाली। उन्होंने पूरी अकीदत के साथ नमाज अदा कराई। नमाज के बाद इमाम साहब ने खुतबा पढ़ा और सामूहिक दुआ मांगी। नमाज खत्म होते ही लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी।

बरौनी में सामूहिक नमाज

बरौनी में ईदगाह व मस्जिद में मुसलमानों ने सामूहिक तौर पर अदा की नमाज बरौनी, निज संवाददाता। बरौनी शहरी व ग्रामीण इलाकों में गुरुवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कुर्बानी का त्योहार ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद काफी धूमधाम से मनाया। ईदगाह व मस्जिदों में मुसलमानों ने सामूहिक तौर पर नमाज अदा करने के बाद एक दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद दिया। नमाज अदा करके देश में शांति, अमन व सद्भावना के लिए सभी ने मिलकर दुआएं मांगी।पर्व को लेकर विशेष तौर पर बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिली। इस दौरान विभिन्न मस्जिदों व ईदगाहों में अमन अमान कायम रखने के लिए मजिस्ट्रेट व पुलिस फोर्स की तैनाती की गई थी।साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बरौनी के दीनदयाल रोड स्थित जामा मस्जिद,फुलवड़िया गंज रहमानी ईदगाह,बारो मस्जिद आदि ईदगाह में नमाज अदा की गई।

गढ़हरा-बारो में बकरीद का उत्सव

गढ़हरा(बरौनी),एक संवाददाता। बकरीद पर्व के मौके पर गढ़हरा- बारो में नमाज अदा करने के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद दी। इस पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह नजर आया। यहां मौलानाओं ने ईदगाह में नमाज अदा कराई। गढ़हरा में लोगों ने मुल्क की तरक्की और भाईचारे की दुआ मांगी।दानिश महबूब ने बताया कि इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार निर्धारित दिनों में कुर्बानी होती है। बेगूसराय में मुसलमानो के शिक्षित गांव बारो और गढ़हरा जिले में बेहतर स्थान है। बताया कि पटना हाईकोर्ट के पहले जज बारो के थे।नेपाल सरकार के सलाहकार सदरे आला रूकुन उद्दीन साहब गढ़हरा से ही थे। सैय्यद शाह जलाल उद्दीन रहमतुल्लाह अलैह का ऐतिहासिक 300 वर्ष पुराना मजार आज भी आसिफपुर गढ़हरा में स्थित है। नमाज अदा करने के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद दी। बकरीद की नमाज अदा करने के लिए लोग नए कपड़े व सिर पर टोपी पहनकर काफी अच्छे दिख रहे थे। आयोजित सभा में बारो के मौलाना अब्दुल्लाह क़ासमी और सामाजिक कार्यकर्ता दानिश महबूब ने सभी बारो गढ़हरा वासियों से बकरीद के मौके पर प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी ना करने की अपील की। इस मौके पर पूर्व मुखिया जफर आलम , तलअत अहमद, मो शाकिर हुसैन, मो जावेद, आसिफ़ इकबाल, चांद आलम का सहयोग सराहनीय रहा।

सामान्य प्रश्न

ईद-उल-अज़हा का त्योहार कब मनाया गया?
ईद-उल-अज़हा (बकरीद) का त्योहार गुरुवार को मनाया गया।
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