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बेगुसराय

धान में रोग की शिकायत : पहले खैरा और अब फफूंद जनित रोग

हिन्दुस्तान टीम,बेगुसरायPublished By: Newswrap
Tue, 21 Sep 2021 07:41 PM
धान में रोग की शिकायत : पहले खैरा और अब फफूंद जनित रोग

गढ़पुरा। निज संवाददाता

प्रखंड क्षेत्र में किसानों द्वारा धान की खेती तो की गई लेकिन कई तरह के रोगों से किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ा है। इनमें मुख्य रूप से फफूंद जनित तथा खैरा रोग शामिल है। कौशलपुर के किसान सिकंदर यादव ने बताया कि शुरुआती दौर में जब धान की रोपनी की गई तो उस दौरान पत्ते पीले पड़ने लगे और अब धान में जब शीश आ चुके हैं उसके बाद फफूंद जनित रोग का प्रभाव बढ़ गया है। किसानों ने बताया कि खैरा रोग होने के बाद यूरिया के साथ जिंक सल्फेट मिलाकर छिड़काव करने के उपरांत तीन से पांच दिन में धान के पौधे स्वस्थ हो गए। जिन किसानों के साथ यह समस्या है उन लोगों ने बाजारों से बीज खरीदे थे । सरकारी स्तर पर किसानों को उपलब्ध कराए गए बीज में यह समस्या नहीं है।

गढ़पुरा प्रखंड में इस बार सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1146.50 हेक्टेयर में धान की खेती की गई है। इसमें श्री विधि से खेती के लिए 28 एकड़ में धान का प्रत्यक्षण किया गया था। इसके अलावा कई अन्य योजनाओं से किसानों को अनुदानित दर पर धान के बीज उपलब्ध कराए गए। बीएओ अशोक पंजियार ने बताया कि सरकारी स्तर पर जो धान के बीज उपलब्ध कराए गए उस फसल में किसी भी तरह के रोग की शिकायत नहीं मिली है। किसानों को जो बीज उपलब्ध कराया गया वह उपचारित बीज था। उन्होंने बताया कि धान की फसल में कोई रोग की शिकायत है तो किसान तुरंत किसान सलाहकार और कृषि समन्वयक को जानकारी दे। जो भी समस्या होगी उसे दूर किया जाएगा। इस बार ऊपरी जमीन में धान की अच्छी पैदावार होने की संभावना है। समय-समय पर बारिश होने से धान की फसल लहलहा रही है।

धान की फसल में लग रहे अनेक प्रकार के रोग से बचाव के लिए करें दवा का छिड़काव

खोदावन्दपुर। निज प्रतिनिधि

धान की फसल में लग रहे अनेक प्रकार के रोग से बचाव के लिए किसान दवा का छिड़काव करें। यह बात कृषि विज्ञान केंद्र खोदावंदपुर के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉक्टर रामपाल ने सोमवार को कही। उन्होंने बताया कि खरीफ के दौरान धान की फसल में कई प्रकार के अलग-अलग बीमारी लग रही हैं। इसमें जीवाणु झुलसा रोग मुख्य हैं। इस रोग में स्ट्रिपोसाइक्लिन 50 ग्राम एवं कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण का ढाई किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। धान के फसल की दूसरी बीमारी सीथ ब्लाइट है। इसमें पौधे के बगल वाले पत्ते के शीथ सड़ने लगते हैं। इसके रोकथाम के लिए खेत में जल निकासी का प्रबंध करें।

ट्राईकोडरमा जैविक कीटनाशक के पांच ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीज उपचार करें या कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण का दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें या वेलिडामाईसिन या हेक्साकोना घोल दो मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

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