
नारी के भीतर के उबाल को प्रदर्शित करती है पुस्तक दर्द का दर्पण
फोटो नंबर: आठ, कर्मयोगी सभागार कर्मचारी भवन में रविवार को कवयित्री कुंदन कुमारी की पहली काव्य पुस्तक दर्द का दर्पण पर परिचर्चा में शामिल डॉ. सीताराम प्रभंजन, राजेंद्र राजन, प्रो. चंद्रभानु प्रसाद...
बेगूसराय, हमारे प्रतिनिधि। प्रगतिशील लेखक संघ की बेगूसराय इकाई की ओर से मासिक रचना गोष्ठी के तहत कवयित्री कुंदन कुमारी की पहली काव्य पुस्तक दर्द का दर्पण पर परिचर्चा का आयोजन रविवार को कर्मयोगी सभागार कर्मचारी भवन में किया गया। अध्यक्षता जिला अध्यक्ष डॉ. सीताराम प्रभंजन ने की एवं संचालन डॉ. शगुफ्ता ताज़वर ने किया। बिहार प्रलेस राज्य महासचिव प्रो. रवीन्द्र नाथ राय ने कहा कि दर्द का दर्पण पुस्तक नारी विमर्श पर केंद्रित है। एलएनएमयू के पूर्व मानविकी संकाय अध्यक्ष प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि यह काव्य पुस्तक कवयित्री की एक सशक्त आवाज है।प्रलेस के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र राजन ने कहा कि औरत जो महसूस करती है वही इस पुस्तक में है।
आज लैगिंग विषमता काफी बढ़ गई है। प्रलेस राज्य सचिव नूतन आनंद ने कहा कि पितृ सत्ता का विरोध नहीं होगा तो समाज आगे नहीं बढ़ेगा। लेखिका कुंदन कुमारी ने कहा कि गरीबी में जिया, अभावग्रस्त जीवन रहा। लेकिन आज उसी शख्स की पहली पुस्तक पर परिचर्चा आयोजित है। यह उनके लिए आश्चर्य से कम नहीं है। परिचर्चा में प्रलेस राज्य अध्यक्ष अरविंद प्रसाद, राष्ट्रीय सचिव सत्येन्द्र कुमार, सुनील सिंह, देव आनंद, मुकुल लाल, राजेंद्र कुमार राजेश ने भी पुस्तक पर गंभीर चर्चा की।

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