
पांच दिसम्बर तक पूरा कर लें गेहूं की बुआई: कृषि वैज्ञानिक
जिले में अब तक 40 प्रतिशत से भी कम हुई है बुवाई बुआई में तेजी नहीं आ रही है। जिला कृषि कार्यालय के अनुसार अब तक रबी फसल की बुवाई 25 प्रतिशत के लगभग है। जिले में करीब एक लाख 19 हजार हेक्टेयर में रबी...
सिंघौल, निज संवाददाता। नवंबर माह बीत जाने के बाद भी जिले में रबी फसल की बुआई में तेजी नहीं आ रही है। जिला कृषि कार्यालय के अनुसार अब तक रबी फसल की बुवाई 25 प्रतिशत के लगभग है। जिले में करीब एक लाख 19 हजार हेक्टेयर में रबी बुआई का लक्ष्य निर्धारित है। इनमें सबसे अधिक 67 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती का लक्ष्य है। एक इर जहां निचले क्षेत्र में पानी नहीं सूखने के कारण अब तक बुआई नहीं हुई है। वहीं जहां समय से गेहूं की बुआई हो गई है वहां बुवाई के बाद गेहूं के पौधे निकल आये हैं।

ऐसे में पूसा स्थित कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे सिंचित तथा समयकालीन गेहूं की बुवाई पांच दिसम्बर तक पूरा कर लें। वैज्ञानिकों का मानना है कि मौसम बुवाई के लिए अनुकूल है और समय से बुवाई होने पर ही किसान अच्छे उपज की उम्मीद कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि बीज को बुवाई से पहले बेबीस्टीन 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से उपचारित करना आवश्यक है। छिटकवी विधि से बुआई के लिए 125 किलोग्राम तथा सीड ड्रिल से पंक्ति बुआई के लिए 100 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है। बुआई से पूर्व खेल में 150-200 क्विंटल कम्पोस्ट, 60 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाना लाभकारी रहता है। वहीं, रबी मक्का की बुआई जल्द से जल्द सम्पन्न करने की सलाह दी गई है। अन्यथा उपज प्रभावित हो सकती है। बुआई के लिए संकर किस्में शक्तिमान 1 सफेद, शक्तिमान 2 सफेद, शक्तिमान 3 पीला, शक्तिमान 4 पीला, शक्तिनान 5 पीला, गंगा 11 नारंगी पीला, राजेन्द्र संकर मक्का 1. राजेन्द्र संकर मक्का 2 एवं राजेन्द्र संकर मक्का दीप ज्वाला तथा संकुल किस्में देवकी सफेद, लक्ष्मी सफेद एवं सुआन पीला इस क्षेत्र के लिए अनुशंसित है। खेत की जुताई में 50 किलोग्गाम नेत्रजन, 75 किलोग्राम फास्फोरस एवं 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करें।

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