Begusarai News: लगभग मिट गया कुओं का अस्तित्व
Begusarai News: मंझौल में कुओं का अस्तित्व तेजी से खत्म हो रहा है। चापाकल के बढ़ने से कुओं का महत्व कम हो गया है। प्राकृतिक जल पुनर्भरण में कुओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी। वर्षा जल संचयन और कुंओं का सही प्रबंधन भूगर्भीय जलस्तर को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

Begusarai News: मंझौल। कुओं का अस्तित्व लगभग मिटता जा रहा है। चापाकल के कारण कुओं का महत्व घटता चला गया। नेचुरल वाटर रिचार्ज में कुओं की भी भूमिका थी। झील,तालाब,मोईन,कुंए नेचुरल वाटर रिचार्ज के प्रमुख साधन थे। वर्षा जल संचयन के बाद ये भूगर्भीय जलस्तर को मेंटेन रखते थे। समुचित नालियों के प्रबंधन के द्वारा तालाब,झील,मोईन में वर्षा जल संचयन किया जा सकता है एवं आवासीय क्षेत्र में जल जमाव को रोका जा सकता है। तालाब एवं मोईन में संचित वर्षा जल का उपयोग फसलों की सिंचाई में किया जा सकता है। सिंचाई में भूगर्भीय जल का अंधाधुंध उपयोग हो रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार स्प्रिंकलर एवं वर्षा जल संचयन से भूगर्भीय जलस्तर के गिरावट को रोका जा सकता है।
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