
नाटक के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर
संक्षेप: सिमरिया धाम में आयोजित राजकीय कल्पवास मेला के तहत संस्कृति संध्या में लोक नृत्य की प्रस्तुति की गई। सुलोचना सामाजिक संस्थान ने महिषासुर वध, जट-जटिन और प्रदूषण पर नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की। कार्यक्रम में जिला कला सांस्कृतिक पदाधिकारी ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया।
सिमरिया धाम, एक संवाददाता। राजकीय कल्पवास मेला सिमरिया धाम में जिला प्रशासन के द्वारा आयोजित संस्कृति संध्या में बुधवार को सुलोचना सामाजिक संस्थान बेगूसराय के द्वारा लोक नृत्य की प्रस्तुति की गई। इसमें बिहार के प्रसिद्ध लोक नृत्य जट-जटिन, सामा चकेवा व अन्य प्रस्तुति के साथ पर्यावरण को समर्पित नृत्य नाटिका की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम के आरंभ में नव्या रीति ने महिषासुर वध की प्रस्तुति दी। भाव नृत्य के माध्यम से महिषासुर वध और आज के दौर में नारी शक्ति को दर्शाया गया। श्रेयस मंडल और शिवानी कुमारी द्वारा जट-जटिन के नृत्य, वही श्रेयस मंडल और अविनाश कुमार के द्वारा प्रदूषण के प्रभाव नृत्य नाटिका प्रस्तुति की गई।

कलाकारों ने नाटक के माध्यम से पेड़ कटने से पर्यावरण को क्या नुक़सान हो रहा है और मनुष्यों में विभिन्न प्रकार के होने वाले बीमारियों से बचने का संदेश दिया। उक्त प्रस्तुति को दर्शकों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। सभी नृत्य की कोरियोग्राफी श्रेयस मंडल मंडल के द्वारा किया गया। मौक़े पर मौजूद ज़िला कला सांस्कृतिक पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी ने संस्था की निर्देशक प्रीति कुमारी, सचिव रविंद्र मनोहर एवं संस्था के संरक्षक इन्द्र मोहन प्रसाद सहित सभी कलाकारों को सम्मानित किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति की श्रद्धालुओं ने काफी प्रशंसा की। वही देर तक श्रद्धालुगण कार्यक्रम में जमे रहें। संचालन रामसुंदर गांधी ने तथा कार्यक्रम सहयोगी के रूप में मनीष कौशिक की भूमिका अहम रही।

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