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भूमि व भवन विहीन स्कूलों को दूर के विद्यालयों में मर्ज करने से बच्चे परेशान

युवा:::::::::छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए 1 से 2 किमी तक की दूरी तय करनी पड़ रही

भूमि व भवन विहीन स्कूलों को दूर के विद्यालयों में मर्ज करने से बच्चे परेशान
हिन्दुस्तान टीम,बेगुसरायFri, 24 May 2024 08:30 PM
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खोदावंदपुर,निज संवाददाता। प्रखंड क्षेत्र के करीब एक दर्जन भूमि व भवन विहीन प्राथमिक विद्यालयों को दूसरे मध्य विद्यालयों में मर्ज किया गया है। इससे छोटे छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए 1 से 2 किमी तक की दूरी तय करनी पड़ रही है। बच्चों को अपने मुहल्ले से पढ़ाई के लिए इतनी दूरी रोज जाने आने से इनके अभिभावकों में असन्तोष व्याप्त है।
जानकारी के अनुसार मेघौल पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय भीड़ बाबा स्थान धर्मगाछी, फफौत पंचायत अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय पश्चिमी टोला फफौत, इसी पंचायत का प्राथमिक विद्यालय दास टोला मटिहानी, बरियारपुर पश्चिमी पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय मटकोरा टोला तथा इसी पंचायत का प्राथमिक विद्यालय सुबी टोला, दौलतपुर पंचायत अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय बेगमपुर पट्टी, सागी पंचायत अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय सागीडीह समेत कई अन्य प्राथमिक विद्यालय भूमि एवं भवन विहीन स्कूल की श्रेणी में हैं। वर्ष 2006 में स्थापित इन स्कूलों को अबतक अपनी जमीन उपलब्ध नहीं हुई है। अपनी भूमि नहीं रहने के कारण शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों को दूसरे मध्य विद्यालयों में मर्ज कर दिया है जहां ये स्कूल संचालित किए जा रहे हैं।

प्राथमिक विद्यालय भीड़ बाबा स्थान धर्मगाछी को मध्य विद्यालय मेघौल में, प्राथमिक विद्यालय पश्चिमी टोला फफौत को प्राथमिक विद्यालय पूर्वी टोला फफौत में, प्राथमिक विद्यालय दास टोला मटिहानी को उत्क्रमित मध्य विद्यालय मटिहानी पश्चिमी टोला में, प्राथमिक विद्यालय मटकोरा टोला बरियारपुर पश्चिमी को मध्य विद्यालय तारा बरियारपुर में, प्राथमिक विद्यालय सुबी टोला बरियारपुर पश्चिमी को प्राथमिक विद्यालय गाछी टोला बरियारपुर पश्चिमी में, प्राथमिक विद्यालय बेगमपुर पट्टी को उत्क्रमित मध्य विद्यालय मोहनपुर में तथा प्राथमिक विद्यालय सागीडीह को उत्क्रमित उर्दू मध्य विद्यालय सागी में मर्ज कर चलाया जा रहा है।

जानकार लोगों ने बताया कि अत्यंत पिछड़े वर्ग के मुहल्लों में शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2006 में कई प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना कराई गई थी। परन्तु पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय अधिकारियों की उदासीनता से इन स्कूलों के भवन निर्माण के लिए जमीन की व्यवस्था नहीं की गई। जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण शिक्षा विभाग द्वारा इन प्राथमिक विद्यालयों को अपनी मूल जगह से दूर दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिया गया। अब इसका खामियाजा छोटे छोटे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

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