जयंती पर याद किये गये लोकगायक बलराम कुंवर

Feb 07, 2026 07:35 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बेगुसराय
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सिमरिया में दिनकर पुस्तकालय के बादल भवन में लोकगायक बलराम कुंवर की 100वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर लोक कला की चुनौतियों पर विचार गोष्ठी हुई, जिसमें वरिष्ठ रंगकर्मी और पत्रकारों ने अपनी राय रखी। गोष्ठी में नई पीढ़ी को लोक कला से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

जयंती पर याद किये गये लोकगायक बलराम कुंवर

सिमरिया धाम, एक संवाददाता। दिनकर पुस्तकालय सिमरिया के बादल भवन में शुक्रवार को बिहार के चर्चित लोकगायक बलराम कुंवर की 100 वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर डिजिटल युग में लोक कला की चुनौतियां व संभावनाएं विषयक विचार गोष्ठी की अध्यक्षता दिनकर पुस्तकालय के वरिष्ठ सदस्य विजय कुमार चौधरी एवं संचालन पत्रकार प्रवीण प्रियदर्शी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संजीव फिरोज ने किया। अतिथियों का स्वागत विश्वंभर सिंह ने किया। वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल पतंग ने कहा कि बलराम कुंवर हमसबों के पुरोधा हैं। आशीर्वाद रंगमंडल के सचिव डॉ. अमित रौशन ने कहा कि आज लोककला से नई पीढ़ी विमुख हो रही है।

आज संयुक्त परिवार टूट कर एकल परिवार में बिखर गया है। पत्रकार पुष्कर प्रसाद सिंह ने बलराम कुंवर के मशहूर गीत मोरे सूनी रे मरइया से डर लागे सुनाया। मॉडर्न थियेटर फाउंडेशन के निदेशक परवेज यूसूफ ने कहा कि नई पीढ़ी को लोककलाकारों से जोड़ने की जरूरत है। गोष्ठी को इंजीनियर कन्हाई पंडित समेत कई अन्य ने संबोधित किया। मौके पर राजेन्द्र राय, गीता राय, गोपाल कुमार, कृष्ण मुरारी, मनीष कुमार, प्रदीप कुमार, सरोज कुमार, विजय कुमार, अशोक पासवान, सुनील कुमार सिंह, विष्णुदेव राय, केदारनाथ भास्कर, प्रियव्रत कुमार, राधे कुमार समेत कई गणमान्य थे।

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