
चार लेबर कोड के खिलाफ 12 फरवरी को आम हड़ताल
बेगूसराय में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की बैठक में चार श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी करार दिया गया। वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर पूंजीपतियों के हित में दबाव बनाने का आरोप लगाया। नई श्रम कानूनों से ठेका मजदूरों के अधिकार खतरे में हैं। मजदूरों ने 12 फरवरी को देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया।
बेगूसराय, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के जिला परिषद सदस्यों की बैठक रिफाइनरी टाउनशिप स्थित सूरज भवन में चन्द्रभूषण भूषण सिंह उर्फ जुलूम सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक में सरकार द्वारा चार श्रम संहिताओं को लागू करने की कोशिशों की कड़ी आलोचना की गई और इसे मजदूर विरोधी करार दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार अपने पूंजीपति मित्रों के हित में अधीनस्थ अधिकारियों पर दबाव बनाकर इन कानूनों को लागू करा रही है। नए श्रम कानून लागू होने से प्रधान नियोजक पीड़ित ठेका मजदूरों को उनका हक देने के लिए बाध्य नहीं रहेंगे। इसके दुष्परिणाम अभी से सामने आने लगे हैं जहां हजारों मजदूरों को न तो छंटनी लाभ मिल रहा है और न ही किए गए काम की पूरी मजदूरी।
एटक नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार चुनाव जीतने के बाद और अधिक हमलावर होकर ट्रेड यूनियन एक्ट को ही खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। न्यूनतम मजदूरी जैसे बुनियादी अधिकार भी खतरे में पड़ जाएंगे। ऐसी स्थिति में मजदूरों ने संयुक्त केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 12 फरवरी को होने वाली देशव्यापी आम हड़ताल को व्यापक रूप से सफल बनाने का संकल्प लिया। मौके पर एटक की राष्ट्रीय सचिव पूर्व विधान पार्षद उषा सहनी, खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व विधायक सूर्यकांत पासवान, एटक केंद्रीय परिषद सदस्य ललन लालित्य, जिला महासचिव प्रह्लाद सिंह, बरौनी तेलशोधक मजदूर यूनियन के सचिव भोगेंद्र कमल, आशा बहू नेत्री सरिता राय, आंगनबाड़ी नेत्री पूनम देवी, खेत मजदूर नेता गोवर्धन, अशोक पासवान आदि थे।

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