
साइबर क्राइम में बैंक कितने जिम्मेदार? महिला प्रोफेसर से 47 लाख ठगी केस में सनसनीखेज खुलासा
बैंक कर्मियों की संलिप्तता को लेकर पुलिस की जांच में तब संदेह हुआ जब पता चला कि महिला प्रोफेसर से हुई ऑनलाइन ठगी के बाद राजस्थान के पाली में स्थित एक निजी बैंक से साइबर अपराधियों ने एक बार में ही 33 लाख की बड़ी राशि की निकासी आसानी से कर ली।
ऑनलाइन ठगी मामले में बैंक कर्मियों की संलिप्तता लगातार सामने आ रही है। अब इसको लेकर पुलिस सख्ती करने की तैयारी में है। भागलपुर की टीएमबीयू की महिला प्रोफेसर डॉ. निर्मला कुमारी को डिजिटल अरेस्ट कर 47.60 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी करने के मामले में भी राजस्थान स्थित एक बड़े निजी बैंक के कर्मियों की संलिप्तता की बात सामने आई है। जांच में ऐसी बात सामने आने के बाद साइबर पुलिस इसकी शिकायत आरबीआई से करेगी। इसके साथ ही उक्त निजी बैंक के भी वरीय पदाधिकारियों से भी संपर्क किया जाएगा। कुछ कर्मियों से पूछताछ भी की जाएगी।
अपराधी ने एक बार में निकाल लिए 33 लाख
बैंक कर्मियों की संलिप्तता को लेकर पुलिस की जांच में तब संदेह हुआ जब पता चला कि महिला प्रोफेसर से हुई ऑनलाइन ठगी के बाद राजस्थान के पाली में स्थित एक निजी बैंक से साइबर अपराधियों ने एक बार में ही 33 लाख की बड़ी राशि की निकासी आसानी से कर ली। उसके बाद बैंक के कर्मी की भूमिका की जांच शुरू हुई तो चौंकाने वाले राज सामने आए। पुलिस इसी लीड पर आगे का अनुसंधान कर रही है।
नियम की खानापूर्ति की गई
आम तौर पांच लाख या उसे ज्यादा राशि की निकासी पर बैंक खाता धारक से जानकारी जरूर लेता है। बड़ी राशि निकासी का कारण भी कई बार पूछा जाता है पर साइबर अपराधियों ने आसानी से उतनी बड़ी राशि की निकासी कर ली। राशि की निकासी से पहले कुछ सेकेंड के लिए बैंक कर्मी ने खाते में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर कॉल किया था और फिर आसानी से राशि की निकासी कर ली गई। बताया गया है कि बैंक कर्मी ने नियम की खानापूर्ति के लिए कुछ सेकेंड के लिए मोबाइल पर कॉल कर राशि निकालकर उन्हें दे दी। जबकि जबतक खाताधारी से बड़ी ट्रान्जेक्शन की पुष्टि नहीं हो जाती तबतक राशि की निकासी नहीं होना चाहिए था।





