बांकीपुर उपचुनावः भाजपा की अग्निपरीक्षा, नितिन नवीन की विरासत के दावेदार कौन? प्रशांत बढ़ाएंगे पारा
भाजपा की इस पारंपरिक सीट पर होने वाला यह उपचुनाव केवल एक विधायक चुनने का जरिया नहीं है, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की साख और उसकी सांगठनिक नीतियों की कड़ी अग्निपरीक्षा भी है।

बांकीपुर उपचुनावः बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा चुने जाने के बाद इस्तीफे के कारण खाली हुई है। भाजपा की इस पारंपरिक सीट पर होने वाला यह उपचुनाव केवल एक विधायक चुनने का जरिया नहीं है, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की साख और उसकी सांगठनिक नीतियों की कड़ी अग्निपरीक्षा भी है। इस सीट पर राजद और जनसुराज भी उम्मीदवार देगा। जनसुराज से प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की चर्चा है।
चुनावी कार्यक्रम जारी करने के बाद अब सभी की निगाहें उम्मीदवारों के चयन पर टिकी हैं। विपक्षी दल जहां इस गढ़ को ढाहने के लिए चक्रव्यूह रच रहे हैं, वहीं भाजपा किसे अपना प्रत्याशी बनाती है, इस पर पार्टी नेताओं के साथ ही गठबंधन के दलों की भी नजरें टिकी हैं।
नितिन नवीन के परिवार का दबदबा
बांकीपुर क्षेत्र पहले पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था। वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद यह बांकीपुर के नाम से जाना जाने लगा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पिता (अब दिवंगत) नवीन किशोर सिन्हा पहली बार 1995 में पटना पश्चिम से विधायक बने। तब से लेकर पटना पश्चिम और बांकीपुर पर भाजपा का ही कब्जा रहा है। वर्ष 2005 में नवीन किशोर सिन्हा के निधन के बाद नितिन नवीन सक्रिय राजनीति में आए और वर्ष 2006 में हुए उपचुनाव में बांकीपुर से जीत हासिल की।
चार-पांच दिनों में साफ होगा बीजेपी का चेहरा
राज्यसभा सदस्य चुने जाने (लगातार दो दशक) तक वे बांकीपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उनके इस्तीफे के बाद इस सीट पर कई दावेदारों की चर्चा है लेकिन इतना तय है कि अगला उम्मीदवार नितिन नवीन की ही पसंद का होगा। मामला राष्ट्रीय अध्यक्ष से सीधा जुड़ा होने के कारण इस सीट को लेकर प्रदेश नेतृत्व भी फिलहाल मौन है। हालांकि उम्मीद है कि अगले चार-पांच दिनों में नाम सामने आ जाएगा। नामांकन की अंतिम तारीख 13 जुलाई है।
विपक्ष से जनसुराज और राजद के प्रत्याशी
विपक्षी दलों की बात करें तो जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बांकीपुर से चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। वे भाजपा को कड़ी चुनौती पेश करेंगे। आम चुनाव में जनसुराज से वंदना कुमारी चुनावी मैदान में उतरी थीं। जबकि महागठबंधन से इस बार फिर राजद ही दावेदारी कर रहा है। 2025 में राजद की उम्मीदवार रेखा कुमारी चुनावी मैदान में उतरी थीं। उपचुनाव में भी पार्टी उन्हीं पर दांव आजमा सकती है। कांग्रेस की इस सीट को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं है।
बीजेपी के संभावित उम्मीदवार कौन?
कायस्थ बहुल इस सीट पर भाजपा कोटे के संभावित लड़ाकों में सबसे अधिक चर्चा इसी समुदाय के नेताओं की है। पूर्व विधान पार्षद प्रो रणवीर नंदन, भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा और डॉ. अजय आलोक का नाम प्रबल दावेदारों में है। रणवीर नंदन अभी बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष हैं। सांगठनिक क्षमता के अलावा क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी उनकी वैचारिक और सांस्कृतिक पकड़ काफी मजबूत रही है। इस नाते वे बांकीपुर के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। ऋतुराज सिन्हा के विस चुनाव लड़ने की संभावना कम है। वैसे नेतृत्व तय कर दे तो दीगर बात होगी। वहीं डॉ. अजय आलोक अभी राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। नितिन नवीन के सीट छोड़ने के बाद भाजपा के पास अभी कायस्थ समाज से कोई विधायक नहीं है, इसलिए तय है कि अगला प्रत्याशी भी इसी समाज से होगा। उधर, भरत तिवारी इनकाउंटर मामले के बाद विपक्ष ने सत्तापक्ष की चुनौती बढ़ा दी है। ऐसे में भाजपा एक मंझे हुए नेता को उतार सकती है जो इस उप चुनाव विपक्ष की चुनौती का मजबूती से मुकाबला कर सके।
भाजपा की जीत तय : संजय सरावगी
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता चौबीसों घंटे काम में लगा रहता है। बांकीपुर की जनता प्रधानमंत्री, गृह मंत्री व केंद्रीय नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट करना चाहती है कि उनके साथ रहने वाले नितिन नवीन आज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। यह बांकीपुर के लिए गौरव की बात है। अध्यक्ष बनने के बाद भी वे बांकीपुर की चिंता कर रहे हैं। वे जब भी बिहार आते हैं, कार्यकर्ताओं से मिलने का क्रम जारी रहता है। जल्द ही उम्मीदवार तय कर लिया जाएगा। कोई भी लड़े, भाजपा की जीत तय है।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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