चापाकल मरम्मत के बजाए पाइप समेट कर निकल रहे हैं पीएचईडी के मिस्त्री

Apr 06, 2026 01:35 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बांका
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पंजवारा(बांका),निज प्रतिनिधि। चापाकलों को ठीक करने के नाम पर विभाग के मिस्त्री मरम्मती करने के बजाय बोरिंग से पाइप निकालकर चंपत हो रहे हैं। विभाग की

चापाकल मरम्मत के बजाए पाइप समेट कर निकल रहे हैं पीएचईडी के मिस्त्री

पंजवारा(बांका),निज प्रतिनिधि। गर्मी की तपिश और गहराते जल संकट के बीच पीएचईडी विभाग की कार्यशैली पंजवारा व इसके आस-पास के इलाकों में सवालों के घेरे में है। चापाकलों को ठीक करने के नाम पर विभाग के मिस्त्री मरम्मती करने के बजाय बोरिंग से पाइप निकालकर चंपत हो रहे हैं। विभाग की इस सुस्ती और लापरवाही ने ग्रामीणों की परेशानी को दोहरी कर दी है। ताजा मामला पंजवारा हाई स्कूल के समीप स्थित काली मंदिर का है। यहां लगा चापाकल खराब पड़ा हुआ था।स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि विभाग इसे दुरुस्त करेगा,लेकिन चार-पांच दिन पूर्व पहुंची मिस्त्रियों की टोली ने चापाकल ठीक करने के बजाय बोरिंग से पाइप बाहर निकाला और उसे अपने साथ लेकर चलते बने।

अब वहां पानी की जगह सिर्फ खाली बोरिंग का गड्ढा बचा है। कुछ ऐसा ही हाल लौढ़िया खुर्द पंचायत के दुबराजपुर कदरसी टोला का है। यहाँ के ग्रामीण पिछले तीन महीने से खराब चापाकल के कारण पानी की एक-एक बूंद के लिए मशक्कत कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जब विभाग को सूचना दी गई,तो मिस्त्रियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि बोरिंग में धंसना गिर गया है और यह बेकार हो चुका है। समाधान निकालने के बजाय यहाँ भी मिस्त्रियों ने पाइप निकाला और उसे लेकर रवाना हो गए। पारा चढ़ते ही इलाके में जलस्तर नीचे चला गया है, ऐसे में चापाकलों का सहारा ही ग्रामीणों की प्यास बुझाता था। लेकिन पीएचईडी विभाग की इस कार्यप्रणाली से लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर विभाग पाइप ही ले जाएगा,तो वे पानी कहाँ से पिएंगे ? इस संबंध में विभागीय अधिकारियों की चुप्पी स्थानीय लोगों की प्यास पर भारी पड़ रही है।

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