
धोरैया विधानसभा में 3 हजार 25 मतदाताओं की नजर में कोई उम्मीदवार उनके हीरो नहीं
संक्षेप: किसी ने कहा कि अनपढ़ ने गलती से दबाया नोटा, तो किसी ने कहा उनकी अपनी सोच।किसी ने कहा कि अनपढ़ ने गलती से दबाया नोटा, तो किसी ने कहा उनकी अपनी सोच। रजौ
रजौन(बांका), निज संवाददाता। बिहार विधानसभा चुनाव में भले ही एनडीए की प्रचंड जीत के बीच बांका जिला के पांचों विधानसभा की सीटों पर एनडीए का ही परचम लहराया है, लेकिन धोरैया विधानसभा में कुल 3 हजार 25 ऐसे भी मतदाता है, जिन्हें कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं आया। ऐसे मतदाताओं ने भले ही अपना मत बर्बाद कर दिया हो, लेकिन इनकी नजर में कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं आए। अब इसके पीछे एक सवाल यह भी उठ रहा है, कि आखिर ऐसे मतदाता किन्हें पसंद करते है, और उनकी सोच में उन्हें कैसा उम्मीदवार चाहिए, यह तो अब वे ही जाने, लेकिन उन्हें किसी पर भरोसा नहीं रहा यह बात फिलहाल उनकी नजर में तो यही सामने आ रही है, हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि ऐसे वोटरों में ऐसे मतदाता भी शामिल है, जो इनोसेंट है, और गलती से भी नोटा का बटम दब गया हो, लेकिन नोटा के प्रति मत तो यह ही फिलहाल साबित कर रहा है कि ऐसे मतदाताओं की नजर में कोई उम्मीदवार उनके नजर में बेकार थे।

अकेले रजौन प्रखंड में एक हजार 190 से भी ज्यादा मतदाताओं ने नोटा का बटम दबाया है। नोटा का बटम दबाने में रजौन प्रखंड से भी ज्यादा मतदाता धुरैया प्रखंड में है, यहां एक हजार 145 मतदाताओं की नजर में कोई उम्मीदवार पसंद नहीं आए। इधर प्रशासन सहित चुनाव आयोग ने स्वीप कार्यक्रम चलाकर मतदाताओं को जागरूक करने की कबायद में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी तो जबरदस्त मतदान तो हुआ,लेकिन नोटा का एक विकल्प रहने से इस विधानसभा में 3025 मतदाताओं ने चुनाव आयोग की अपील को स्वीकार तो किया,लेकिन अपना मत नोटा को देकर अपनी सोच को भी कमोवेश दिखाया है, हालांकि लोकतंत्र के लिए नोटा को चयन करने वाले कहा तक सही है,यह तो समीक्षा का विषय है।

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