
रजौन प्रखंड के ओड़हारामें ही पंचायत सरकार भवन बनाने का मुद्दा फिर गरमाया
बोले बांका-बोले बांका- ग्रामीणों ने मांग को लेकर उच्च न्यायालय में रिट याचिका किया दायर, लड़ेंगे आर-पार की लड़ाई। ग्रामीणों ने विधानसभा
रजौन(बांका), निज संवाददाता। रजौन प्रखंड के ओड़हारा पंचायत मुख्यालय में पंचायत सरकार भवन बनाने की मांग पर ओड़हारा गांव के ग्रामीण आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। पिछले 15 अगस्त को इस पंचायत के कटिया गांव में पंचायत सरकार भवन बनाने के लिए भूमि पूजन किए जाने के पहले फिर बाद में भी मुद्दा प्रशासन तक पहुंचा था, लेकिन प्रशासन से कथित कोई सुनवाई नहीं होने के बाद मामला उच्च न्यायालय पटना तक पहुंच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मुखिया अपने निहित स्वार्थ्य को लेकर पंचायत सरकार भवन यहां नहीं बनाना चाहते है। ओड़हारा पंचायत मुख्यालय के ग्रामीणों ने इस बार 2025 के विधानसभा चुनाव में 11 नवंबर को मात्र 14 मत देने के बाद अपने मतों का बहिष्कार कर दिया था।

इसके बाद जिला प्रशासन सहित स्थानीय प्रशासन की बेचैनी भी बढ़ गई थी, हालांकि डीसीएलआर मनीष कुमार, सीओ कुमारी सुषमा व थानाध्यक्ष चंद्रदीप कुमार के पहल पर आक्रोशित मतदाताओं को उनकी मांगों को लेकर आश्वस्त किया गया, फिर बांका डीएम नवदीप शुक्ला से टेलीफोनिक वार्ता के क्रम में उनसे आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीण दोपहर करीब 12:15 बजे मतदान के लिए तैयार हुए थे। रजौन प्रखंड के ओड़हारा पंचायत मुख्यालय गांव में ही, पुराना पंचायत भवन है, हालांकि पर्याप्त मात्रा में सरकारी जमीन नहीं रहने के बाद ही कटिया गांव में सीओ कुमारी सुषमा ने पंचायत सरकार भवन के निर्माण के लिए एनओसी पंचायती राज विभाग को दिया। इधर ग्रामीणों का कहना है कि मुखिया साजिश के तहत ग्राम सभा और कार्यकारिणी की बैठक किए बिना ही शिलान्यास कर दिए। बहरहाल पंचायत सरकार भवन के लिए तात्कालिक सीओ मोहम्मद मोयूद्दीन ने भी भूमि की तलाश की थी। इधर सरकारी जमीन पर्याप्त मात्रा में नहीं रहने के बाद वर्तमान सीओ ने ग्राम सभा में लिए गए निर्णय के बाद कटिया गांव के सरकारी जमीन पर पंचायत सरकार भवन बनाने के लिए एनओसी दे दी। इधर ओड़हारा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा व कार्यकारिणी के बैठक की दस्तावेज ही झूठी है। पहले से ही पंचायत भवन इसी गांव में है। प्रखंड मुख्यालय से यह गांव भी करीब है, और पंचायत का अन्य गांव भी सटा हुआ है। ओड़हारा गांव के दो ग्रामीण माननीय राज्यपाल के नाम अपनी निजी जमीन दान देने को ना सिर्फ तैयार है, बल्कि इकरारनामा भी कर चुके है। ग्रामीणों का कहना है कि लेकिन स्थानीय प्रशासन इकरारनामा पर अगली कार्रवाई करने में कोई अभिरुचि नहीं दिखाई। ग्रामीणों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। यह और बात है कि सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं रहने पर ही दान की जमीन लेने के लिए पहल करने का प्रावधान है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत मुख्यालय में अगर वर्तमान मुखिया पंचायत सरकार भवन बनाने के लिए पहल करते तो अन्य जगह भूमि पूजन करने की नौबत नहीं आती। अब यहां के ग्रामीण अपने मुख्यालय गांव में ही पंचायत सरकार भवन बनाने के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने की ठान ली है। इधर मामला कोर्ट में चले जाने के बाद निर्माण कार्य भी तत्काल अधर में लटक गया है। अब कोर्ट के आदेश का इंतजार है। बोले जिम्मेवार मैं भी मानता हूं कि पंचायत सरकार भवन प्राथमिकता के तौर पर मुख्यालय गांव में ही बननी चाहिए, लेकिन तात्कालिक सीओ ने उस वक्त सरकारी भूमि की जब तलाश करनी शुरू की तो सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हो सका। इधर आम सभा के बाद वर्तमान सीओ ने जहां के सरकारी जमीन का एनओसी विभाग को सौंपा वहां विभाग के आदेश पर नियमानुकूल भूमि पूजन किया गया है। अब मामला कोर्ट में है तो कोर्ट के आदेश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रवीण कुमार सिंह, मुखिया, ओड़हारा

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