
बांका : उपेक्षा का शिकार मंदार पर्वत, नष्ट होती जा रही हैं हजारों वर्ष पुरानी धरोहरें
बिहार का मंदार पर्वत प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों का भंडार है, लेकिन इसे संरक्षण की कमी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इसे पुरातत्व विभाग की सूची में शामिल करने की मांग की है। यदि संरक्षण नहीं किया गया, तो यह ऐतिहासिक स्थल नष्ट हो जाएगा।
बौंसी, निज संवाददाता। बिहार का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व से समृद्ध मंदार पर्वत प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों का एक विशाल भंडार है, लेकिन विडंबना यह है कि आज तक इसे पुरातत्व विभाग के आधिकारिक मानचित्र में स्थान नहीं मिल सका है। संरक्षण और समुचित देखरेख के अभाव में यहां मौजूद दुर्लभ मूर्तियां, शिलाखंड, शिलालेख एवं प्राचीन लिपियां धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही हैं। पिछले दो दशकों से स्थानीय लोग एवं सामाजिक संगठन मंदार पर्वत को पुरातत्व विभाग की सूची में शामिल करने की मांग करते आ रहे हैं, किंतु यह मांग अब तक फाइलों में ही दबी हुई है। पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह स्थल प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
वर्ष 2012 में शांति निकेतन के पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ टीम ने मंदार पर्वत का विस्तृत सर्वेक्षण किया था। सर्वे के दौरान कामधेनु मंदिर, नगाड़ा पोखर, लखदीपा मंदिर, चैतन्य महाप्रभु चरण चिह्न स्थल सहित कई स्थानों से महत्वपूर्ण पुरातात्विक नमूने एकत्र कर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपी गई थी। रिपोर्ट में मंदार क्षेत्र को खुदाई योग्य तथा अत्यंत महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल घोषित किया गया, लेकिन आज तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।पुरातत्वविदों के अनुसार मंदार पर्वत से प्राप्त अधिकांश प्रतिमाएं उत्तर गुप्त काल की मानी जाती हैं। पर्वत शिखर पर स्थित शिव मंदिर तथा बलभद्र अंकित शिलालेख भगवान विष्णु से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संकेत प्रदान करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन अवशेषों पर रंग-रोगन, घी-धूप और अनियंत्रित छेड़छाड़ पर रोक नहीं लगाई गई, तो इनका मौलिक स्वरूप पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। मंदार पर्वत पर स्थित शिव मंदिर, सीताकुंड, शंखकुंड, गयाकुंड, सुखदेव मुनि गुफा, नरसिंह गुफा, राम झरोखा जैसे अनेक पुरातात्विक स्थल लगातार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। कई दुर्लभ प्रतिमाओं की चोरी की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसे देखते हुए स्थानीय बुद्धिजीवियों एवं सामाजिक संगठनों ने मंदार पर्वत क्षेत्र में एक संग्रहालय (म्यूजियम) के निर्माण की मांग तेज कर दी है, ताकि यहां प्राप्त मूर्तियों और धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सके। संरक्षण नहीं हुआ तो इतिहास खो जाएगा। मंदार पर्वत केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि पुरातात्विक दृष्टि से भी बिहार की अमूल्य धरोहर है। यदि समय रहते इसका वैज्ञानिक संरक्षण, दस्तावेजीकरण और सरकारी संरक्षण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली इतिहास से वंचित रह जाएंगी।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




