चाचा-भतीजे की एक साथ मौत, गर्भवती पत्नी की चीखों से दहल उठा गांव
दुर्घटना की साइड स्टोरीदुर्घटना की साइड स्टोरी एक साथ 3 शव गांव पहुंचते ही फूट पड़ा दर्द, गांव में पसरा मातम पूरे गांव में नहीं जला चूल्हा, सन्नाटे और

कटोरिया (बांका), निज प्रतिनिधि। शनिवार का दिन कटोरिया प्रखंड के मौथाबाड़ी पंचायत के बनरझोप गांव के लिए काल बनकर आया। सुल्तानगंज-देवघर मुख्य मार्ग पर जिलेबिया मोड़ के पास दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत ने न सिर्फ एक घर, बल्कि पूरे गांव की खुशियों को छीन लिया। सबसे हृदयविदारक पहलू यह है कि मृतक आपस में चाचा-भतीजे के रिश्ते में थे, जिससे यह त्रासदी और भी मार्मिक बन गई। मृतक सुरेंद्र साह, मृतक बालेश्वर साह के सगे भाई तुलसी साह के पुत्र थे, जबकि मृतक रूपेश कुमार, बालेश्वर साह के चचेरे भाई सोहन साह के बेटे थे।
पोस्टमार्टम के बाद शनिवार दोपहर बाद जब तीनों का शव गांव पहुंचा, तो पूरा माहौल करुण क्रंदन से गूंज उठा। हर तरफ चीख-पुकार मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बालेश्वर साह के घर में उनकी दोनों पत्नियां धमनी देवी और भूमि देवी बेसुध होकर बार-बार गिर पड़ रही थीं। वे कभी पति के शव से लिपट जातीं तो कभी बच्चों को गले लगाकर फूट-फूटकर रोने लगतीं। पुत्र नितीश कुमार और पुत्री सुलोचना कुमारी के सिर से पिता का साया उठ जाने से वे पूरी तरह टूट चुके हैं। वहीं सुरेंद्र साह के घर में भी मातम पसरा हुआ है। पिता तुलसी साह बेटे के वियोग में गहरे सदमे में हैं और उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। पत्नी चंचलिया देवी बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। छोटे-छोटे बच्चे अभी यह समझ भी नहीं पा रहे हैं कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन घर का माहौल देखकर वे भी सहमे हुए हैं और रोते-बिलखते अपनी मां से चिपके हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार मृतक तीनों मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे और घर के मुख्य कमाऊ सदस्य में से एक थे। उनके असमय निधन से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि तीनों बाइक से अपने गांव बनरझोप से बेलहर थाना क्षेत्र के मटियानी गांव, मृतक रूपेश कुमार की बहन के घर जा रहे थे। ग्रामीणों में चर्चा है कि परिवार में किसी नवजात की मृत्यु हो गई थी, जिसको लेकर ही तीनों किसी झाड़ फूंक करने वाले के पास जा रहे थे। हालांकि पीड़ित परिवार इस बात से इनकार कर रहे हैं। इस हादसे का सबसे मार्मिक और दिल दहला देने वाला दृश्य रूपेश कुमार के घर है। उसकी पत्नी गौरी कुमारी, जिनके गर्भ में आठ माह का बच्चा पल रहा है, पति के शव को देखते ही दहाड़ मारकर रो पड़ी। वह बार-बार पति के शव से लिपटकर यही कह रही थीं कि अब उनके बच्चे का सहारा कौन बनेगा। उसक करुण विलाप सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। आसपास की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन पति के वियोग का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा था। एक ओर जीवनसाथी को खोने का गहरा दुख, तो दूसरी ओर गर्भ में पल रहे बच्चे के भविष्य की चिंता इन दोनों ने उसे पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। मौके पर मौजूद कोई व्यक्ति इस दृश्य को देखकर खुद को रोने से नहीं रोक नहीं सका। हर कोई यही कह रहा था कि भगवान ऐसा दिन किसी को न दिखाए। इस हृदयविदारक घटना का असर सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे बनरझोप गांव को गहरे दुख में डुबो दिया। शनिवार को गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। हर घर में मातम का माहौल था और लोग अपने-अपने काम छोड़कर पीड़ित परिवारों के पास पहुंचते रहे। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी घटना बहुत कम देखी है, जहां एक ही परिवार के तीन-तीन सदस्य एक साथ दुनिया छोड़ दें। ग्रामीणों ने दिनभर खाना नहीं बनाया और शोक में डूबे रहे। बच्चे तक चुपचाप बैठे रहे और गांव में एक अजीब सा सन्नाटा पसरा रहा। लोग समूह बनाकर मृतकों के घर पहुंचते रहे, परिजनों को ढांढस बंधाते रहे, लेकिन इस अपूरणीय क्षति के सामने हर सांत्वना बेअसर नजर आ रही थी। पूरे गांव में सिर्फ एक ही चर्चा थी, इस दर्दनाक हादसे की, जिसने कई जिंदगियां एक साथ उजाड़ दीं।
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