मंझला जंगल में किया गया तीनों शव का अंतिम संस्कार
परिजनों के घरों के अंदर से उठती रही सिसकियां, गांव में पसरा सन्नाटा हर दिल सिसक उठा। चाचा-भतीजे की एक साथ उठी अर्थी ने न सिर्फ एक परिवार, बल्कि पूरे ग

कटोरिया (बांका), निज प्रतिनिधि। शनिवार देर शाम जब एक ही परिवार के तीन लोगों की चिता जली, तो कटोरिया के बनरझोप गांव का हर दिल सिसक उठा। चाचा-भतीजे की एक साथ उठी अर्थी ने न सिर्फ एक परिवार, बल्कि पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया। तीनों का अंतिम संस्कार गांव के लोगों की मौजूदगी में मौथाबाड़ी के मंझला जंगल में किया गया। उस वक्त वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं और माहौल बेहद भावुक हो गया था। घटना के बाद से गांव की जिंदगी जैसे थम सी गई है। न कहीं पहले जैसी चहल-पहल है और न ही रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियां।
हर ओर सन्नाटा और गम का माहौल पसरा हुआ है। घटना के दूसरे दिन भी रविवार को गांव में सन्नाटा पसरा रहा। वहीं शनिवार की रात सिसकियों की आवाजें गूंजती रहीं। रुक रुककर रोने की आवाज से रात का सन्नाटा रह रहकर टूटता रहा। मृतकों के घरों से उठती करुण क्रंदन की आवाजें पूरे माहौल को और भी गमगीन बना रही थीं। गांव के लोग बताते हैं कि परिजनों का विलाप सुनकर हर किसी का दिल भर आता है। मृतक बालेश्वर साह, सुरेंद्र साह और रुपेश कुमार के घर में हर कोई गहरे सदमे में है और किसी से कुछ कहा नहीं जा रहा। ग्रामीण का कहना है कि परिवार पहले से ही दुख में डूबा था, सुरेंद्र साह के नवजात पोते की जन्म के 48 घंटे के भीतर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से परिवार में जादू-टोना जैसी आशंकाओं को लेकर भय और तनाव बना हुआ था। ऐसे में यह हादसा परिवार के लिए दूसरा बड़ा आघात साबित हुआ है। रूपेश कुमार के घर का दृश्य सबसे अधिक हृदयविदारक बना हुआ है। घर का इकलौता सहारा रूपेश टोटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसकी मौत से परिवार की आर्थिक रीढ़ ही टूट गई है। उसकी पत्नी गौरी कुमारी, जो आठ माह की गर्भवती हैं, पति के गम में पूरी तरह बिखर चुकी हैं। कभी वह जोर-जोर से रो पड़ती हैं, तो कभी खामोश होकर पेट पर हाथ रखे बैठ जाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, रूपेश अपने आने वाले बच्चे को लेकर काफी चिंतित रहता था और उसी जिम्मेदारी के भाव से वह उस दिन भी घर से निकला था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और वह वापस नहीं लौट सका। इस हादसे का असर पूरे गांव पर पड़ा है। गांव के लोगों ने अपने-अपने कामकाज लगभग छोड़ दिए हैं और दिनभर पीड़ित परिवारों के पास जुटे रहते हैं। गांव में कई घरों में चूल्हा तक नहीं जल रहा है। लोग शोक में डूबे हुए हैं और हर बातचीत का केंद्र यही घटना बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि एक ही परिवार के तीन कमाऊ सदस्यों की एक साथ मौत ने पूरे गांव को अंदर तक हिला दिया है। लोग इस घटना को याद कर बार-बार भावुक हो उठते हैं। हर कोई पीड़ित परिवार के साथ खड़ा नजर आ रहा है, लेकिन इस अपूरणीय क्षति के सामने किसी के पास शब्द नहीं हैं। फिलहाल बनरझोप गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और हर तरफ सिर्फ गम और दर्द का माहौल है।
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