जिले में कई जगहों पर रोजान लगता है जाम, आमजन परेशान
बोले बांकाबोले बांका बांका। हिन्दुस्तान टीम बांका जिले की पहचान अब केवल ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या प्रशासनिक केंद्र के रूप में ही

बांका, हिन्दुस्तान टीम। बांका जिले की पहचान अब केवल ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या प्रशासनिक केंद्र के रूप में ही नहीं, बल्कि लगातार लगने वाले जाम से जूझते शहर के रूप में भी बनती जा रही है। जिले के प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों पर जाम की समस्या आम हो चुकी है। खासकर शहर के शिवाजी चौक, गांधी चौक, आज़ाद चौक, डोकनिया मार्केट और कटोरिया रोड के जगतपुर जैसे इलाके प्रतिदिन किसी न किसी समय जाम की चपेट में आ ही जाते हैं। साथ ही कटोरिया बाजार, रजौन बाजार, बौंसी बाजार, अमरपुर बाजार भी इस स्थिति से रोजाना गुजरता है। यह स्थिति न सिर्फ आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है, बल्कि प्रशासनिक दावों पर भी सवाल खड़े कर रही है।शहर
में प्रायः मुख्य रूप से शिवाजी चौक से लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों में जाम की स्थिति उत्पन्न होती रहती है। सुबह के समय जहां स्थिति सामान्य रहती है, वहीं दोपहर ढलते-ढलते और खासकर शाम के वक्त जाम विकराल रूप ले लेता है। कार्यालयों की छुट्टी, स्कूल-कॉलेज की छुट्टी और बाजारों में बढ़ती भीड़ के कारण सड़कों पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ जाता है। गांधी चौक से शिवाजी चौक तक की दूरी महज आधा किलोमीटर है। सामान्य परिस्थितियों में इस दूरी को तय करने में अधिकतम पांच मिनट का समय लगता है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कभी कभी शाम के समय में इसी आधे किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को आधे घंटे से भी अधिक का समय लग जाता है। दोपहिया वाहन चालक हों या चारपहिया, सभी जाम में फंसकर परेशान नजर आते हैं। कई बार तो पैदल चलने वाले लोगों को भी आगे बढ़ने में मशक्कत करनी पड़ती है।हालांकि यह भी स्वीकार करना होगा कि पिछले कुछ वर्षों में यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयासों के कारण शहर के इस क्षेत्र में लंबी जाम की समस्या में कुछ हद तक कमी जरूर आई है। यातायात पुलिस की तैनाती, चौक-चौराहों पर बैरिकेडिंग और समय-समय पर किए गए ट्रैफिक प्रयोगों से पहले की तुलना में हालात थोड़े बेहतर जरुर हुए हैं।बावजूद इसके, समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। विशेषकर प्रतियोगी परीक्षाओं अथवा बिहार बोर्ड द्वारा संचालित परीक्षाओं के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। परीक्षा केंद्रों की अधिक संख्या और परीक्षार्थियों के साथ आने वाले अभिभावकों के कारण आज़ाद चौक से लेकर शिवाजी चौक तक अलग-अलग जगहों पर कभी-कभार भारी जाम लग जाता है। इस दौरान कई परीक्षार्थी समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच पाने की आशंका से मानसिक तनाव में नजर आते हैं। जबकि पर्व-त्योहारों के मौके पर जाम की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। शिवाजी चौक से लेकर डोकनिया मार्केट तक बेवजह जाम लग जाता है। त्योहारों में खरीदारी के लिए उमड़ने वाली भीड़, अस्थायी दुकानों की भरमार और सड़क किनारे बेतरतीब ढंग से खड़े वाहन यातायात को पूरी तरह बाधित कर देते हैं।जिससे स्थानीय दुकानदारों और ग्राहकों के बीच जगह को लेकर अक्सर नोकझोंक की स्थिति भी बन जाती है। जबकि जाम की एक प्रमुख वजह सड़क किनारे बढ़ता अतिक्रमण भी है। कई दफा दुकानदार अपने उत्पादों को बेचने के लिए दुकान के निर्धारित स्थान से बाहर निकलकर सड़क की अतिरिक्त जगह पर सामान सजा देते हैं। इससे सड़कें संकरी हो जाती हैं और वाहनों के आवागमन में भारी दिक्कतें आती हैं। थोड़ी सी भी भीड़ या वाहन खराब होने की स्थिति में लंबा जाम लग जाता है, जिसे हटाने में काफी समय लग जाता है। यातायात प्रबंधन की दृष्टि से शहर की कुछ सड़कें बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। गांधी चौक से लेकर शिवाजी चौक तक की सड़क शहर की जीवनरेखा कही जाती है। इसी सड़क के माध्यम से शहर के कई प्रमुख इलाकों को जोड़ा जाता है।वहीं बेहतर यातायात प्रबंधन के लिए अलीगंज की सड़क भी काफी हद तक सहायक साबित होती है। इसके अलावा गांधी चौक से जगतपुर तक की सड़क शहर की सबसे व्यस्ततम सड़कों में शामिल है, क्योंकि इसी मार्ग से होकर शहरवासी सदर अस्पताल जाते हैं। इस सड़क पर जाम लगने से कई दफा मरीजों, एंबुलेंस और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आए दिन लगने वाले जाम का असर सिर्फ समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है। जाम के कारण शहर में ईंधन की अत्यधिक खपत हो रही है। वाहन लंबे समय तक चालू रहने से पेट्रोल और डीजल अधिक जलता है, जिससे वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा असर शहरवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सांस से जुड़ी बीमारियां, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव और कार्यक्षमता में कमी जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। पूर्व में कई जनप्रतिनिधियों के अलावा जिले के कई समाजसेवियों ने शिवाजी चौक पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने और शहर के बाहर बाईपास सड़क के निर्माण की मांग उठाई थी। उनका तर्क था कि, बाईपास बनने से भारी वाहनों का दबाव शहर के भीतर से कम होगा और जाम की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी। लेकिन दुखद पहलू यह है कि आज तक इस मांग का कोई ठोस असर जमीन पर नजर नहीं आया है। न तो स्थायी रूप से अतिक्रमण हटाया गया और न ही बाईपास निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल होती दिख रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए और ठोस रणनीति के तहत अतिक्रमण हटाने, पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने की दिशा में कदम उठाए, तो बांका शहर को जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। फिलहाल शहरवासी रोजाना जाम के झाम से जूझने को मजबूर हैं और उन्हें प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद बनी हुई है। क्या कहते हैं जिम्मेदार शहर में जाम की समस्या को लेकर यातायात पुलिस लगातार निगरानी कर रही है। मुख्य चौक-चौराहों पर यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए जवानों की तैनाती की गई है। अतिक्रमण और सड़क किनारे अवैध रूप से लगाए गए दुकानों के कारण कई बार जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसको हटाने के लिए नगर परिषद और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई की जा रही है। परीक्षा और पर्व-त्योहार के दौरान अतिरिक्त ट्रैफिक प्लान लागू किया जाता है, ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। साथ ही आमजनों से भी अपील है कि, वे यातायात नियमों का पालन करें और सड़क पर जहां तहां वाहन खड़ा न करें। नीरज कुमार, यातायात डीएसपी बांका

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