
सुल्तानगंज भाया कटोरिया-देवघर रेल परियोजना की कागजी तैयारी शुरू
पेज तीन की लीडपेज तीन की लीड हिन्दुस्तान विशेष 20 साल पहले ही इस परियाजना को मिली थी मंजूरी रेलवे निर्माण विभाग की ओर से पूर्व में कराए गए
बांका, निज प्रतिनिधि। सुल्तानगंज भाया कटोरिया- देवघर रेल परियोजना को धरातल पर उतारने का रास्ता साफ हो गया है। इस परियोजना को 20 पहले ही स्वीकृति मिल गई थी। लेकिन इस परियोजना के लिए फंड नहीं मिलने से सर्वे और डीपीआर बनाने के बाद इसकी फाइल ठंडे बस्ते में बंद हो गई थी। अब जब रेलवे बोर्ड से इस परियोजना पर काम करने की सहमति मिल गई है तो फिर से तमाम रिपोर्ट्स और सर्वे का अध्ययन किया जा रहा है। इसको लेकर रेलवे निर्माण विभाग के कार्यालय में पूर्व कराए गए सर्वे सहित अन्य दस्तावेज निकाल कर उसकी कुंडली खंगाली जा रही है।

फिलवक्त सर्वे के मुताबिक अलाइटमेंट, बजट और अन्य कार्यों का आंकलन किया जाएगा। इसके बाद इस परियोजना में टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पूरी संभावना है कि डीपीआर भी रिवाइज हो सकता है। हालांकि, अब आवंटन मिल जाएगा और तमाम तैयारियों के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। वहीं, रेल परियोजना के क्रियान्वयन में सर्वाधिक समय जमीन अधीग्रहण में लगता है। इसलिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जितनी जल्दी पूरी हो जाएगी, परियोजना पर काम भी जल्दी पूरा हो जाएगा। यहा परियोजना करीब 70 किलोमीटर लंबी है। बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पूर्व रेल मंत्री आश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना को पूरा कराने की सहमति दी थी। इस रेल परियोजना के धारतल पर उतने के बाद अजगैवीनाथ से वैद्यनाथ धाम की दूरी काफी कम हो जाएगी। अभी सुल्तानगंज वाया किऊल ट्रेन से जाने पर 180 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड रही है। जबकि, सुल्तानगंज से भाया भागलपुर-बांका होते हुए देवघर की दूरी 133 किलोमीटर है। वहीं, जब सुल्तानगंज से भाया तारापुर, बेलहर व कटोरिया होते हुए देवघर तक रेल लाईन बन जाने से इसकी दूसरी घटकर 104 किलोमीटर रह जाएगी। सुल्तानगंज भाया कटोरिया-देवघर रेल परियोजना पूर्ण होने से रोजगार के भी कई नए द्वार खुलेंगे। पूर्व के सर्वे के मुताबिक ये रेल लाईन सुल्तानगंज, कटोरिया, नोनसर, असरगंज, तारापुर, रामपुर, बेलहर से होकर गुजरेगी। अभी तक इस इलाके से होकर कोई भी दूसरी रेल लाईन नहीं गुजारी है। आज भी इन इलाकों के सैकडों लोगों को ट्रेन पकडने के लिए या तो भागलपुर आना पडता है या फिर सुल्तानगंज जाना पडता है। अब इन इलाकों में ट्रेन सेवा शुरू होने से आर्थिक विकास भी होगा। बोले अधिकारी सुल्तानगंज भाया कटोरिया-देवघर रेल परियोजना बहुत पुराना है। इसके पुराने रिकॉर्डस और रिपोर्ट निकलवाए जा रहे हैं। उसका अध्ययन करने के बाद ही इस परियोजना की प्रक्रिया आगे बढेगी। जिसमें भूमि अधिग्रहण व अन्य कार्य शामिल हैं। जिसे पूरा होने के बाद इसका टेंडर निकाला जाएगा। हेमंत कुमार, डिप्टी सीई, रेलवे कंस्ट्रक्शन भागलपुर।

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